13-अक्टूबर-2021 | एनसीआर प्लानिंग बोर्ड ने शहरों के बीच बेहतर संपर्क कायम करने के लिए ड्राफ्ट रीजनल प्लान-2041 को मंजूरी दे दी है। इस प्लान के तहत भविष्योन्मुख, झुग्गी मुक्त राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में एयर एंबुलेंस, हेलीटैक्सी, रोड, रेल और जलमार्ग के जरिये तेज गति संपर्क की परिकल्पना की गई है। ड्राफ्ट प्लान में तेज रफ्तार रेल के जरिये 30 मिनट में एनसीआर के बड़े शहरों के बीच आवागमन और मास ट्रांजिट रेल सिस्टम के जरिये एनसीआर के नजदीकी सीमाओं से 30 मिनट में दिल्ली पहुंचने के लिए विशेष उपाय करने पर जोर है। एक आधिकारिक बयान में बताया गया है कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (एनसीआरपीबी) की मंगलवार को हुई बैठक में इस ड्राफ्ट प्लान को मंजूरी दी गई। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय शहरी मामले और आवास मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने की। योजना का मसौदा लोगों की राय के लिए जल्द ही सार्वजनिक किया जाएगा। बोर्ड ने जनता की राय के लिए रखे जाने वाले इस ड्राफ्ट में कुछ बदलाव किए हैं। इसकी सोच है कि तय प्रक्रिया के तहत लोगों की राय के अनुसार जरूरी बदलाव करने के बाद ड्राफ्ट योजना का अंतिम रूप मार्च 2022 तक बोर्ड से स्वीकृत करवा लिया जाए। इस बैठक में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल, दिल्ली के शहरी विकास मंत्री सत्येंद्र जैन, राजस्थान के शहरी विकास मंत्री शांति कुमार धारीवाल, उत्तर प्रदेश खादी ग्रामोद्योग और एमएसएमई मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह के अलावा कई वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। रीजनल प्लान-2041 का जोर एनसीआर के शहरों को स्मार्ट संपर्क वाले क्षेत्र में बदलने पर है, जिसमें बुलेट ट्रेन, हेलीटैक्सी सेवा और स्मार्ट सड़कें होंगी और क्षेत्र को आर्थिक रूप से संपन्न बनाया जाएगा और यहां की पूरी आधारभूत संरचना नागरिक केंद्रित होगी। इसके लिए पूरे एनसीआर में वायु, रोड, रेल और जल मार्ग से परिवहन को उन्नत बनाया जाएगा।
शहरों के बीच बुलेट ट्रेन से 30 मिनट में पहुंचेंगे
ड्राफ्ट में कहा गया है कि पूरे एनसीआर में यात्रा का समय घटाना महत्वपूर्ण है और इसके लिए ये तय किया गया है कि तेज रफ्तार बुलेट ट्रेन या हेलीटैक्सी से एक से दूसरे शहर में 30 मिनट के अंदर, दूसरी ट्रेनों से 60 मिनट के अंदर और दो से तीन घंटे के अंदर कार से पहुंचा जा सके। दिल्ली को एनसीआर के बड़े शहरों से सुपरफास्ट ट्रेन से मात्र 30 मिनट की दूरी पर होना चाहिए। ड्राफ्ट में इलेक्ट्रिक परिवहन ढांचे को बढ़ावा देने की भी योजना है। इसके अलावा जल और वायु की गुणवत्ता सुधारने, पर्यावरण संरक्षण, शहरी पुनर्निर्माण, आसान जीवन यापन, झुग्गी मुक्त क्षेत्र, 24 घंटे एयर एंबुलेंस, स्वच्छ और स्मार्ट एनसीआर आदि कुछ और बड़े कदम हैं जिन पर इस योजना में जोर रहेगा।
चार राज्यों के 25 जिले हैं योजना में
एनसीआरपीबी पूरी दिल्ली, उत्तर प्रदेश के आठ जिले, हरियाणा के 14 जिले और राजस्थान के दो जिलों को कवर करता है। कुल मिलाकर बोर्ड के दायरे में 55,083 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र आता है। बोर्ड की योजना है कि इस पूरे क्षेत्र को हेलीटैक्सी से जोड़ा जाए ताकि पर्यटन को बढ़ावा मिल सके। ड्राफ्ट के अनुसार हेलीटैक्सी की सेवा हर जिला मुख्यालय और पर्यटन केंद्रों पर उपलब्ध होगी। योजना में प्रस्ताव रखा गया है कि इस क्षेत्र को विश्वस्तरीय विमानन हब में बदला जाएगा और इसके लिए हर जिले में हेलीपोर्ट और एयरपोर्ट बनाए जाएंगे।
दो और एक्सप्रेस-वे बनेंगे
ईस्टर्न और वेस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस-वे के अलावा नए ड्राफ्ट में दो और एक्सप्रेस-वे के निर्माण की योजना बनाई गई है। पहले सर्कुलर एक्सप्रेस-वे के जरिये पानीपत-शामली-मेरठ-जेवर-नूह-भिवाडी-रेवाड़ी-झज्जर-रोहतक-पानीपत और दूसरे एक्सप्रेस-वे के जरिये करनाल-मुजफ्फरनगर-गढ़मुक्तेश्वर-नरौरा-अलीगढ़-मथुरा-डीग-अलवर-महेंद्रगढ़-चरखी दादरी- भिवानी-कैथल-करनाल को जोड़ा जाएगा। एनसीआर प्लान का अनुमान है कि एनसीआर की आबादी 2031 तक 7 करोड़ और 2041 तक 11 करोड़ पहुंच सकती है।
एनसीआर के लिए 100 किलोमीटर की सीमा
रीजनल प्लान-2041 के तहत अब राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की सीमा दिल्ली के राजघाट से 100 किलोमीटर तक तय कर दी गई है। यानी राजघाट से चारों ओर 100 किलोमीटर के दायरे में आने वाले शहर या गांव इस योजना के दायरे में आएंगे। इससे पहले ये सीमा 150 से लेकर 175 किलोमीटर तक थी। इसका अर्थ ये है कि अब 100 किलोमीटर के दायरे में ही सड़कों, रेल या हवाई नेटवर्क का विकास किया जाएगा। बोर्ड के सूत्रों ने कहा कि गुरुग्राम, फरीदाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और मेरठ आदि शहर अब भी एनसीआर बोर्ड का अंग रहेंगे।
Source;-“अमर उजाला”
