First FIR: नए आपराधिक कानूनों के तहत भोपाल में रात 12.08 बजे FIR दर्ज हुई, जबकि जबकि राजधानी दिल्ली में रोजानामचा (जनरल डायरी) में दर्ज समय रात 1.57 बजे है।
New Criminal Laws: देश में नए आपराधिक कानूनों के तहत पहली FIR किस राज्य और किस शहर में हुई है, ये बड़ा सवाल हो गया है। वो इसलिए कि कानून लागू होने के कुछ घंटों बाद अलग-अलग जगहों से मामले सामने आ रहे हैं और दावा किया जा रहा है कि उनके राज्य और शहर में पहली एफआईआर दर्ज हुई है। खैर, इसका जवाब अब तक सामने आई FIR कॉपी के मिनट-टू मिनट समय से मिल जाता है। अब तक जो मामले सामने आए हैं, समय के हिसाब से देश में पहली FIR मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में दर्ज की गई थी।
तीन नए आपराधिक कानून भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) पिछले साल दिसंबर में संसद में पारित हुए थे। इन तीन कानूनों ने अब भारतीय दंड संहिता (आईपीसी)- 1860, आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी)- 1973 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम- 1872 की जगह ली है। एक जुलाई रात 12 बजे से देश में नए आपराधिक कानून लागू हो चुके हैं। इसके तहत संभवतः देश में पहली FIR भोपाल में दर्ज की गई।
दिल्ली नहीं, भोपाल में पहली FIR दर्ज हुई

भोपाल में रात के 12 बजकर 8 मिनट पर FIR दर्ज हुई। थाना जहांगीराबाद में बुजुर्ग महिला के साथ मारपीट और थाना हनुमानगंज में युवक के साथ मारपीट का मामला दर्ज किया गया था। दोनों मामले नए कानून BNS के तहत दर्ज किए गए थे। जबकि राजधानी दिल्ली में FIR का जो समय है, वो रात को 1 बजकर 57 मिनट है, जब रोजानामचा (जनरल डायरी) दर्ज किया गया।

दिल्ली में रेहड़ी वालों के खिलाफ पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी। देर रात पेट्रोलिंग के दौरान पुलिसकर्मी ने देखा एक शख्स रेलवे स्टेशन के पास बीच सड़क पर रेहड़ी लगाकर पानी, सिगरेट बेच रहा था, जिससे लोगों को आने जाने में दिक्कत हो रही थी। आरोप हैं कि कई बार कहने पर रेहड़ी वाला वहां से रेहड़ी हटाने को राजी नहीं था। बाद में पुलिसकर्मी ने उसका नाम पता पूछकर नए कानून BNS की धारा 285 के तहत एफआईआर दर्ज की। मामला सेंट्रल दिल्ली के कमला मार्किट थाने का है।

दिल्ली से पहले एक और मामला नए कानूनों के तहत छत्तीसगढ़ में दर्ज हो चुका था। छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में Sections 296 and 351(2) के तहत रेंगाखार थाने में FIR दर्ज हुई थी। यहां रोजानामचा (जनरल डायरी) दर्ज करने का समय रात के 12 बजकर 30 मिनट का है।

देश में आज से नए आपराधिक कानून लागू
देश में आपराधिक न्याय प्रणाली को पूरी तरह से बदलने वाले एक कदम के तहत तीन नए आपराधिक कानून आज, 1 जुलाई से लागू हो चुके हैं। अंग्रेजों के जमाने से चले आ रहे भारतीय दंड संहिता, सीआरपीसी, भारतीय साक्ष्य अधिनियम…ये सारे नियम बदले गए हैं और नए तरीके के कानून लागू हुए हैं। तीनों नए कानूनों को 21 दिसंबर 2023 को संसद की मंजूरी मिली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 25 दिसंबर 2023 को अपनी मुहर लगाई थी।
- आपराधिक मामलों में सुनवाई समाप्त होने के 45 दिनों के भीतर फैसला।पहली सुनवाई के 60 दिनों के भीतर आरोप तय किए जाएंगे। गवाहों की सुरक्षा और सहयोग सुनिश्चित करने के लिए गवाह सुरक्षा योजनाएं लागू करनी होगी।
- चाइल्ड ट्रैफिकिंग को जघन्य अपराध की श्रेणी में लाया गया है, जिसके लिए कड़ी से कड़ी सजा का प्रावधान है।
- रेप पीड़िता के बयान उनके अभिभावक या रिश्तेदार की मौजूदगी में महिला पुलिस अधिकारी दर्ज करेगी। मेडिकल रिपोर्ट 7 दिनों के भीतर पूरी की जाएगी। नाबालिग के साथ गैंगरेप के लिए मौत की सजा या फिर आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है।
- शादी के झूठे वादे कर शारीरिक संबंध बनाने वालों के लिए नए आपराधिक कानून में सजा का प्रावधान है।
- वेश्यावृत्ति के उद्देश्य से बच्चे को खरीदने पर कम से कम 7 साल की सजा का प्रावधान। इसे बढ़ाकर 14 साल करने और जुर्माने का भी प्रावधान है।
- महिलाओं के साथ अपराध के मामले में पीड़िता को मुफ्त इलाज दिया जाएगा। केस में 90 दिनों के अंदर नियमित अपडेट हासिल करने का अधिकार होगा।
- आरोपी हो या पीड़ित, दोनों को 14 दिनों के भीतर FIR, पुलिस रिपोर्ट, चार्जशीट, बयान, कबूलनामे और अन्य दस्तावेजों की कॉपी हासिल करने का अधिकार होगा।
- किसी भी घटना में FIR कराने के लिए पुलिस स्टेशन आने की जरुरत नहीं। रिपोर्ट ऑनलाइन माध्यम दर्ज कराई जा सकेगी। जीरो FIR के तहत व्यक्ति किसी भी पुलिस स्टेशन में, चाहे उसका अधिकार क्षेत्र कुछ भी हो, प्राथमिकी दर्ज करा सकता है।
- किसी भी गिरफ्तार व्यक्ति को अपनी स्थिति के बारे में अपने करीबी को सूचित करने का अधिकार है, ताकि उसे तत्काल सहायता मिल सके।
- गंभीर अपराध के मामलों में फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की टीम का घटनास्थल पर जाना और सबूत इकट्ठा करना अनिवार्य है।
- समानता को बढ़ावा देने के लिए लिंग में अब ट्रांसजेंडर समुदाय भी शामिल। महिलाओं के खिलाफ कुछ अपराधों के लिए पीड़िता के बयान को महिला मजिस्ट्रेट दर्ज करेंगी।
- अगर महिला मजिस्ट्रेट ना हो तो पुरुष मजिस्ट्रेट को महिला की उपस्थिति में बयान दर्ज कराना होगा। बलात्कार से संबंधित बयान ऑडियो-वीडियो माध्यम से दर्ज किए जाएंगे, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित हो और पीड़िता को सुरक्षा मिले।
SOURCE – REPUBLIC BHARAT MUMBAI
