28-सितम्बर -2021 | हफ़ीज़ बनारसी द्वारा लिखे गए ये पंक्तियां कामयाबी का सूत्र हैं. इसी सूत्र को दुनियाभर की अलग-अलग भाषाओं में अलग-अलग तरीके से कहा गया है, लेकिन सबका सार एक ही है कि मंजिल पाने के लिए चलते रहना चाहिए और हार नहीं माननी चाहिए. अपने दम पर अरबपति बनने वाली कैनवा (Canva) की को-फाउंडर और सीईओ (CEO) मेलानी पर्किन्स (Melanie Perkins) की कहानी का सार भी बिलकुल यही है. उन्होंने अपने जीवन में 100 बार से भी ज्यादा रिजेक्शन झेलीं और बिजनेस की दुनिया में आज उनका जो मुकाम है, वहां कुछ चंद लोग ही पहुंच पाए हैं. इनकी कहानी से हर वो इंसान प्रेरित हो सकता है जो कुछ बड़ा करना चाहता है, मगर उसे बार-बार निराशा हाथ लगती है.
क्या है कैनवा और क्या है इसकी खासियत
कैनवा एक ग्राफिक डिजाइन ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है. यहां आप जो भी डिजाइन बनाना चाहें, बना सकते हैं. जब आप गूगल में Canva सर्च करते हैं तो इसकी वेबसाइट सबसे पहले आती है, जिसका पूरा टाइटल है Canva. Design for everyone. मतलब सब लोगों के लिए डिजाइन. जिनको डिजाइनिंग की नॉलेज नहीं है, वे भी बड़ी आसानी से डिजाइन बना सकते हैं. और यही इस प्लेटफॉर्म की खूबी है कि बिना डिजाइनिंग की जानकारी के भी सुंदर डिजाइन बनाए जा सकते हैं. अब इसका इस्तेमाल प्रोफेशनल डिजाइनर्स भी करते हैं और वे लोग भी करते हैं जिन्हें डिजाइन की स्पेलिंग तक लिखनी नहीं आती.
पार्ट टाइम टीचिंग के दौरान आया आइडिया
मेलानी अभी मात्र 34 साल की हैं. उनका जन्म 1987 में ऑस्ट्रेलिया में हुआ था. 2007 में वे एक यूनिवर्सिटी में पार्ट टाइम टीचिंग कर रही थीं. उन्हें बच्चों को डेस्कटॉप डिजाइन सॉफ्टवेयर सिखाना था. मेलिना को तब लगा कि वह सॉफ्टवेयर काफी जटिल है और उसे सीखना व सिखाना आसान नहीं है. ऊपर से वह सॉफ्टवेयर काफी महंगा भी है. यहीं से उन्हें कैनवा बनाने का विचार आया. उन्हें लगा कि एक ऐसा टूल होना चाहिए, जिसमें कोई भी इंसान डिजाइनिंग कर पाए.
यूं शुरू हुई कंपनी
मेलिना ने तभी एक बिजनेस पार्टनर के साथ फ्यूज़न बुक्स (Fusion Books) नाम की कंपनी शुरू कर दी. फ्यूज़न बुक्स भी एक डिजाइन कंपनी थी. मेलिना के बिजनेस पार्टनर थे क्लिफ ऑबरेक (Cliff Obrecht). दोनों बिजनेस पार्टनर क्लिफ और मेलिना बाद में लाइफ पार्टनर बन गए. दोनों ने शादी कर ली. 2012 में एक और व्यक्ति कैमरन एडम्स (Cameron Adams) इनके साथ जुड़ा और तीनों ने मिलकर कैनवा की शुरूआत की. कैनवा अन्य प्लेटफॉर्म्स की बजाय कहीं ज्यादा आसान था.
100 बार किया गया रिजेक्ट
हर बिजनेस की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उसे कब और कितनी फंडिंग मिलती है. यदि 100 से भी ज्यादा बार किसी के आइडिया को रिजेक्ट कर दिया जाए तो सामने वाले को अपने आइडिया पर शक होने लगेगा. लेकिन मेलिना के साथ ऐसा नहीं हुआ. उन्हें खुद में और अपने आइडिया में पूरा भरोसा था. अपनी पहली फंडिंग पाने में कंपनी को तीन साल का वक्त लग गया. मेलिना पर्किन्स खुद बताती हैं कि दरअसल उनकी गलत अप्रोच के चलते ही फंडिंग मिलने में दिक्कत हुई. गलत अप्रोच से मतलब है कि बिजनेस को जिस तरीके से पेश किया जाना चाहिए, उस तरीके से न करके, कंपनी तकनीकी बातों में अटकी रही. जब भी किसी संभावित निवेशक (Investor) से बात होती तो उसे कैनवा के तकनीकी उपाय (टेक्नीकल सोल्यूशन) बताए जाते. और इस तरह की सैकड़ों मीटिंग्स का अंत एक जैसा रहा. शून्य.
कहानी के जरिए समझाया
मेलिना पर्किन्स और उनके पार्टनर्स को धीरे-धीरे समझ में आया कि निवेशकों को टेक्नीकल सोल्यूशन नहीं जानने हैं. वे कुछ और जानना चाहते हैं. तब इन्होंने अपनी अप्रोच बदली. अब इन्होंने संभावित निवेशकों को कहानी बताना शुरू किया. मेलिना निवेशकों को बताती थीं कि किस तरह उनके स्टूडेंट्स परेशान होते थे. वे कहते थे कि केवल यह जानने में एक पूरा समेस्टर निकल जाता है कि सॉफ्टवेयर के बटन कहां हैं. इसी परेशानी का समाधान करने के लिए कैनवा बनाया गया है और लोग लगातार कैनवा से जुड़ रहे हैं. बस, फिर क्या था… संभावित निवेशक, निवेशकों में तब्दील होने लगे और कंपनी बढ़ने लगी.
आज क्यों हर जगह छाई हैं मेलिना पर्किन्स
पिछले दो-तीन दिनों में दुनियाभर के अखबारों, न्यूज़ वेबसाइट्स और टीवी चैनलों पर मेलिना पर्किन्स का जिक्र जरूर हुआ है. इसकी वजह है कैनवा (Canva) को हाल ही में मिला 200 मिलियन डॉलर का निवेश. इस निवेश के बाद कैनवा किसी भी महिला द्वारा चलाये गए दुनिया के तमाम स्टार्ट-अप्स में से पहली पंक्ति का स्टार्टअप बन गया है. कंपनी कि वेल्यू इस समय 40 बिलियन डॉलर है. रुपयों में कहें तो 22 खरब से भी ज्यादा.
कहानी के जरिए समझाया
मेलिना पर्किन्स और उनके पार्टनर्स को धीरे-धीरे समझ में आया कि निवेशकों को टेक्नीकल सोल्यूशन नहीं जानने हैं. वे कुछ और जानना चाहते हैं. तब इन्होंने अपनी अप्रोच बदली. अब इन्होंने संभावित निवेशकों को कहानी बताना शुरू किया. मेलिना निवेशकों को बताती थीं कि किस तरह उनके स्टूडेंट्स परेशान होते थे. वे कहते थे कि केवल यह जानने में एक पूरा समेस्टर निकल जाता है कि सॉफ्टवेयर के बटन कहां हैं. इसी परेशानी का समाधान करने के लिए कैनवा बनाया गया है और लोग लगातार कैनवा से जुड़ रहे हैं. बस, फिर क्या था… संभावित निवेशक, निवेशकों में तब्दील होने लगे और कंपनी बढ़ने लगी.
आज क्यों हर जगह छाई हैं मेलिना पर्किन्स
पिछले दो-तीन दिनों में दुनियाभर के अखबारों, न्यूज़ वेबसाइट्स और टीवी चैनलों पर मेलिना पर्किन्स का जिक्र जरूर हुआ है. इसकी वजह है कैनवा (Canva) को हाल ही में मिला 200 मिलियन डॉलर का निवेश. इस निवेश के बाद कैनवा किसी भी महिला द्वारा चलाये गए दुनिया के तमाम स्टार्ट-अप्स में से पहली पंक्ति का स्टार्टअप बन गया है. कंपनी कि वेल्यू इस समय 40 बिलियन डॉलर है. रुपयों में कहें तो 22 खरब से भी ज्यादा.
Source:-News18हिंदी
