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छत्‍तीसगढ़ में ‘सैप’ की कमियों का नतीजा है बिजली बिल घोटाला

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03 दिसंबर 2021 | छत्‍तीसगढ़ प्रदेश की सरकारी बिजली वितरण कंपनी (सीएसपीडीसीएल) में बिल घोटाला की परते धीरे-धीरे खुल रही हैं। अभी तक अंबिकापुर, मस्तूरी और शिवरीनारायण में 20 करोड़ रुपये से ज्यादा की क्षति सामने आ चुकी है। कंपनी के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार वास्तविक नुकसान इससे अधिक है। अभी इसका सही अनुमान भी नहीं लगाया जा सकता। वजह यह है कि यह पूरी गड़बड़ी सिस्टम- एप्लीकेशन एंड प्रोडक्ट (सैप) की कमियों का फायदा उठाकर किया गया है।

बिजली इंजीनियरों के अनुसार कंपनी का पूरा कामकाज इसी सैप कंप्यूटर साफ्टवेयर पर निर्भर है। केवल उपभोक्ता सेवा ही नहीं बल्कि कंपनी का आंतरिक कामकाज भी इसी सिस्टम के माध्यम से होता है। इसके बावजूद सैप के प्रबंधन पर किसी का ध्यान नहीं है। सैप प्रणाली में कई खामियां हैं जिन्हें लंबे समय से दूर करने के बजाय दबाया जा रहा है। सैप साफ्टवेयर में बिजली बिलिंग में हेराफेरी करने की बड़ी गुंजाइश के रूप में खामियां मौजूद हैं।

इंजीनियरों का आरोप है कि सैप सिस्टम को बनाए रखने और उस पर प्रतिवर्ष होने वाले भारी खर्च से कंपनियों के कतिपय उच्च अधिकारियों के निहित स्वार्थ जुड़े हुए हैं। विश्वस्त सूत्रों के अनुसार दो साल पहले राजनंदगांव में बिजली बिलों में लगभग छह करोड़ रुपये की गड़बड़ी पाई गई थी। इस संबंध में चार सहायक अभियंताओं, दो कनिष्ठ अभियंताओं और पांच लिपिकों को आरोप पत्र जारी कर विभागीय जांच की गई थी। लेकिन न तो सैप कंप्यूटर प्रणाली के दोष दूर किए गए और न बिलिंग साफ्टवेयर बदला गया।

आरोपित लोकसेवकों पर भी कार्रवाई नहीं हुई। अब जाकर जब बिजली बिल घोटाले बढ़ता हुआ भारी आकार सामने आया तो आनन-फानन में दो साल पुराने प्रकरण में वेतनवृद्धि रोकने का आदेश कुछ दिन पहले जारी किया गया है। वहीं, बीते तीन-चार दिनों में 11 मुख्य अभियंताओं का अचानक तबादला कर दिया गया है। चर्चा है कि कंपनी प्रबंधन ने अपनी खाल बचाने और नाकामी छिपाने के लिए चीफ इंजीनियरों का तबादला किया है।

इसी वर्ष अप्रैल में अपग्रेड करने का दावा

इस मामले में फिलहाल कंपनी प्रबंधन के लोग खुलकर कुछ भी कहने तो तैयार नहीं है। वहीं, एक अधिकारी ने बताया कि सैप सिस्टम को इसी वर्ष अप्रैल में अपग्रेड किया गया था। वहीं, इंजीनियरों का कहना है कि साफ्टवेयर में यह अपडेशन केवल मोर बिजली एप के लिए किया गया था।

स्टाफ का पता नहीं, बैठा दिए चीफ इंजीनियर

कंपनी में हाल ही में किए गए चीफ इंजीनियरों के तबादले में एके तिर्की को विजिलेंस में पदस्थ किया गया है। वहां पहले से ही सरोज तिवारी पदस्थ हैं। कंपनी के अफसरों के अनुसार विजिलेंस की टीम में मैदानी अमले की कमी है। एचटी विजिलेंस में तो केवल एक ही एसई हैं। अफसरों का कहना है कि चीफ इंजीनियर की बजाए वहां अन्य स्टाफ की पदस्थापना की जाती तो जांच आदि में तेजी आती।

Source :-“नई दुनिया”


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