• June 7, 2026 3:12 am

कुंभ से लेकर कार्निवल तक, क्या आपने देखें है देश के वो 15 बड़े मेले, जहां उमड़ती है लाखों की भीड़

Share More

अक्टूबर 5 2023 ! विवधता में एकता का संदेश देने वाला भारत हमेशा से पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है. ये देश की संस्कृति, परंपरा और संस्कारों का ही कमाल है कि सात समंदर पार बैठे लोग भी यहां खिंचे चले आते हैं. यहां के खान पान से लेकर त्योहारों की रौनक तक, हर चीज सबसे अलग सबसे खास है. इन्हीं खास चीजों में शामिल हैं देशभर के कई राज्यों में लगने वाले वो बड़े मेले जिनमें हर साल लाखों की तादाद में पर्यटक पहुंचते है. इनमें से कई मेले ऐसे हैं जहां लोग आस्था की डुबकी लगाते हैं जबकि कुछ में अलग-अलग प्रतियोगिताओं का लुत्फ उठाया जाता है.

1. कुंभ मेला प्रयागराज

दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन, कुंभ मेला उत्तर प्रदेश के प्रयागराज ( इलाहाबाद) में गंगा नदी के तट पर होता है. इसे महाकुंभ के नाम से जाना जाता है. महाकुंभ 12 साल में एक बार और अर्धकुंभ हर 6 साल में एक बार लगता है. प्रयागराज में अगले कुंभ मेले का आयोजन साल 2025 में होगा. इस दौरान महाकुंभ का स्नान 13 जनवरी पौष पूर्णिमा से शुरू होगा. इसके बाद 14 जनवरी को मकर संक्रांति पर शाही स्नान, 29 जनवरी को मौनी अमावस्या का शाही स्नान, 3 फरवरी को वसंत पंचमी का शाही स्नान होगा. इसके बाद 4 फरवरी को अचला सप्तमी, 12 फरवरी को माघ पूर्णिमा और 26 फरवरी को महाशिवरात्रि पर आखिरी स्नान होगा. इस तरह 45 दिनों तक चलने वाले महाकुंभ के दौरान तीन शाही स्नान होंगे जो 21 दिनों में पूरे होंगे. यह त्यौहार भगवान शिव के स्मरण के लिए आयोजित किया जाता है जिसमें शामिल होने के लिए दूर दराज से लोग पहुंचते हैं.

2. सोनपुर मेला

ये मेला बिहार के सोनपुर में हर साल कार्तिक पूर्णिमा (नवंबर-दिसंबर) में लगता हैं. इसे एशिया के सबसे बड़े पशु मेले के तौर पर जाना जाता है. यह भारत के सबसे बड़े गाय मेलों में से एक हैं. यह मेला बिहार के सोनपुर शहर में आयोजित किया जाता है और यह राज्य के 13 ऐसे मेलों में से एक है. हर साल इस मेले में बीस लाख से अधिक लोग गाय, बैल और बछड़े बेचने और खरीदने के लिए इकट्ठा होते हैं.

3. पुष्कर मेला- राजस्थान

पुष्कर मेला हर साल कार्तिक पूर्णिमा के दिन होता है. पुष्कर मेला राजस्थान के पुष्कर में आयोजित किया जाता है जो अक्टूबर नवंबर में लगता है और यह दुनिया के सबसे बड़े ऊंट मेलों में से एक है.

4. हेमिस गोम्पा मेला लद्दाख

हेमिस गोम्पा मेले का बौद्ध धर्म में काफी महत्व है जिसे बौद्ध धर्म के गुरु पद्मसंभव की जयंती के रूप में मनाया जाता है. ये मेला बौद्धिक कैलंडर के अनुसार हर साल पांचवे महीने में मनाया जाता है.

5. कोलायत मेला राजस्थान

कोलायत मेला प्रतिवर्ष अक्टूबर और नवंबर में कार्तिक माह में आयोजित किया जाता है. गोकुल एकादशी के अवसर पर राजस्थान के कोलायत में हिंदू इकट्ठा होते हैं. हिंदुओं का मानना ​​है कि उनके पूर्वजों की राख यहां मौजूद है. यह मेला हर साल कोलायत शहर के पास एक मंदिर में आयोजित किया जाता है.

6. गंगासागर मेला पश्चिम बंगाल

गंगा सागर में लगने वाला मेला हर साल 8 जनवरी से शुरू होता है और 16 जनवरी तक चलता है. मान्यता है कि गंगासागर के पास ही कपिल मुनि आश्रम बना कर तपस्या करते थे. ये मेला हर साल पश्चिम बंगाल के सागर द्वीप पर मनाया जाता है

7. चंद्रभागा मेला ओडिशा

सूर्यदेव के सम्मान में हर साल माघ सप्तमी को इस मेले का आयोजन चंद्रभागा समुद्र तट पर किया जाता है.यह मेला हर साल सितंबर में चंद्रभागा नदी के तट पर आयोजित किया जाता है जब हजारों लोग इसके पवित्र जल में स्नान करने के लिए इकट्ठा होते हैं.

8. गणगौर मेला राजस्थान

हर साल चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाले गणगौर पर्व का खास महत्व है. इसी पर्व के तहत राजस्थान में गणगौर मेले का आयोजन किया जाता है. गणगौर की पूजा चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन की जाती है. भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित इस त्योहार का सुहागिनों के लिए काफी महत्व है. इस दिन पति की लंबी उम्र की कामना के साथ महिलाएं व्रत रखती हैं और विधि विधान से पूजा करती हैं.

9. अंबुबाची मेला असम

प्रतिवर्ष जून के महीने में यह मेला उस वक्त लगता है जब मां कामाख्या के ऋतुमती रहने के दौरान लगने वाले अंबुबाची मेला भी काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. इस मेले का आयोजन असम में हर साल जून के महीने में किया जाता है. इस दौरान मां भगवती के गर्भ गृह के कपाट खुद ही बंद हो जाते हैं और उनके दर्शन भी वर्जित होते हैं. तीन दिनों के बाद मां भगवती की रजस्वला समाप्ति पर उनकी विशेष पूजा एवं साधना की जाती है.

10. महा शिवरात्रि मेला महाराष्ट्र

यह त्यौहार प्राचीन काल से हर साल मार्च या अप्रैल में आयोजित किया जाता रहा है, यह उत्सव तीन दिन और तीन रात तक चलता है.

11. तरणेतर मेला गुजरात

यह मेला भाद्रपद (अगस्त-सितंबर) के पहले सप्ताह में आयोजित होता है. तरणेतर मेला गुजरात राज्य में सबसे रंगीन कार्यक्रमों में से एक है. यहां एक कुंड (जलाशय) है जिसको लेकर मान्यता है कि इसके जल में एक डुबकी लगाना पवित्र नदी गंगा में डुबकी लगाने के बराबर है.

सोर्स :- ” TV9 भारतवर्ष    


Share More

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *