12 अप्रैल2022 | वैशाख महीने के आखिरी दिनों में लगातार तीज-त्योहार और पर्व रहेंगे। इन व्रत-त्योहारों का सिलसिला 12 मई से शुरू होकर 16 तारीख तक चलेगा। इनमें गुरुवार को मोहिनी एकादशी, शुक्रवार को प्रदोष व्रत इसके अगले दिन नृसिंह प्राकट्य दिवस फिर सूर्य संक्रांति पर्व और सोमवार को वैशाख महीने की पूर्णिमा रहेगी। इसी दिन साल का पहला चंद्र ग्रहण होगा। हालांकि ये भारत में नहीं दिखेगा। इसलिए इसका धार्मिक महत्व भी नहीं रहेगा। इसके अगले दिन से ज्येष्ठ महीना शुरू होगा।
जानिए किस दिन कौन सा त्योहार…
मोहिनी एकादशी (गुरुवार, 12 मई) : वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोहिनी एकादशी कहते हैं। मोहिनी एकादशी व्रत रखने से जाने-अनजाने में हुए पाप खत्म हो जाते हैं। इस व्रत को करने से हर तरह की मनोकामना पूरी होती है।
प्रदोष व्रत (शुक्रवार, 13 मई) : वैशाख मास में पड़ने वाले प्रदोष व्रत को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। नारद जी ने बताया कि वैशाख मास को ब्रह्माजी ने सब महीनों में उत्तम सिद्ध किया है। यह मास संपूर्ण देवताओं द्वारा पूजित है। इसलिए इस महीने में पड़ने वाले प्रदोष व्रत के प्रभाव से दाम्पत्य जीवन में सुख बढ़ता है। शरीरिक परेशानियां दूर हो जाती हैं।
नृसिंह प्राकट्योत्सव (शनिवार, 14 मई) : पद्म पुराण के मुताबिक वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी पर भगवान नरसिंह प्रकट हुए थे। ये भगवान विष्णु का चौथा अवतार था। इनका आधा शरीर सिंह और आधा इंसान का था। इन्होंने राक्षस हिरण्यकश्यप को मारकर भक्त प्रहलाद को बचाया था।
सूर्य संक्रांति (रविवार, 15 मई) : इस दिन सूर्य वृष राशि में आता है। इसलिए इसे वृष संक्रांति कहते हैं। इस पर्व पर स्नान, दान, व्रत और पूजा-पाठ का खास महत्व होता है। इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर तीर्थ स्नान कर के सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इस दिन पानी में तिल डालकर नहाने से बीमारियां दूर होती हैं और लंबी उम्र मिलती है।
वैशाख पूर्णिमा (सोमवार, 16 मई) : वैशाख महीने की पूर्णिमा पर ब्रह्मा जी ने तिल का निर्माण किया था। इसलिए उस दिन दोनों तरह के तिल यानी सफेद और काले तिल वाले जल से नहाना चाहिए। इस तिथि पर अग्नि में तिल की आहुति देना चाहिए। साथ ही इस पूर्णिमा पर तिल और शहद से भरा बर्तन दान दें। ऐसा करने से हर तरह के पाप, परेशानियां और दोष खत्म हो जाते हैं।
Source;- ‘’दैनिकभास्कर’’
