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छत्तीसगढ़ में पर्यटन की विकास की असीम संभावनाएं

ByPrompt Times

Sep 29, 2022
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29 सितंबर 2022 | राज्य में पर्यटन की विकास की असीम संभावनाओं को देखते हुए प्राकृतिक और सांस्कृतिक महत्व के स्थलों का विकास किया जा रहा है। यहां के पर्यटन क्षेत्रों को राष्ट्रीय और  अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति दिलाने के लिए बहुआयामी विकास की दिशा में कार्य किये जा रहे हैं। जनजातीय अंचल की कला-संस्कृति कों विश्वपटल पर लाने के लिए राज्य सरकार द्वारा विशेष प्रयास किये जा रहे हैं। रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा से ग्रामीण पर्यटन का  विकास किया जा रहा है। इन स्थलों में खान-पान एवं आवास की सुविधा युक्त होटल, मोटल ,रिसार्ट एवं रेस्टोरेंट की सुविधा विकसित की जा रही है।
ऐसी मान्यता है कि भगवान राम का ननिहाल होने के कारण छत्तीसगढ़ में  राम नाम की महिमा यहां की संस्कृति में रची बसी हुई है। छत्तीसगढ़ की संस्कृति में जब किसी से मिला जाता है तो राम नाम से संबोधन किया जाता है। यहां के कण-कण में राम का नाम बसा है। यहीं भगवान राम की माता ‘‘ माता कौशल्या‘‘ का पूरे विश्व का एकमात्र मंदिर स्थित है। राजधानी रायपुर के निकट चंदखुरी स्थान पर यह मंदिर स्थित है। इस स्थान की महिमा और जनमानस में बसी भगवान राम की आस्था को देखकर राज्य सरकार द्वारा चंदखुरी का विकास पौराणिक कथाओं में दर्शाए गए वातावरण के अनुसार किया जा रहा है। वनवास के दौरान भगवान का राम के चरण जिस-जिस स्थान पर पड़े उन राममय क्षेत्र का विकास ‘‘ राम वनगमन पर्यटन परिपथ विकास परियोजना‘‘ के माध्यम से किया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल द्वारा राम वनगमन पर्यटन परिपथ के 75 स्थलों को चिन्हित किया गया  है। पहले चरण में 9 स्थलों सीतामढ़ी-हरचौका (कोरिया), रामगढ़ (सरगुजा), शिवरीनारायण (जांजगीर-चांपा), तुरतुरिया (बलौदाबाजार), चंदखुरी (रायपुर), राजिम (गरियाबंद), सिहावा-सप्तऋषि आश्रम (धमतरी), जगदलपुर (बस्तर) और रामाराम (सुकमा) में ‘राम वनगमन पर्यटन परिपथ‘ के रूप में नई सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। पूरे परिसर का सैांदर्यीकरण भी किया जा रहा है। राम वन गमन पर्यटन परिपथ लम्बाई लगभग 2260 किलोमीटर है जिसका  निर्माण, चौड़ीकरण एवं मरम्मत का कार्य किया जा रहा है। यहां पर्यटकों के ठहरने, भोजन, पानी, पार्किंग आदि की व्यवस्था के लिए छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल द्वारा कार्य किया जा रहा है।

राज्य के डोंगरगढ़ पहाड़ी पर माता बम्लेश्वरी देवी विराजमान है। यह पहाड़ी राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ नगर में स्थित है। माँ बम्लेश्वरी की इस नगरी डोंगरगढ़ को भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय ने प्रसाद योजना में शामिल किया है। इस योजना के तहत् डोंगरगढ़ का महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल के रूप में व्यवस्थित विकास का काम हाथ में लिया गया है। यहां श्राद्धालुओं के लिए ‘‘श्रीयंत्र‘‘ के बनावट के अनुरूप पिलग्रिम एक्टिविटी सेंटर (श्रद्धालुओं के लिए सुविधा केन्द्र) का निर्माण  किया जा रहा है। इन प्रयासों से राज्य में पर्यटन को उद्योग के रूप में स्थ अपित करने में भी निश्चित ही मदद मिलेगी.\

Source:-” वी के झा ” 

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