4 मई 2023 ! भारत की चीन से अदावत किसी से छिपी नहीं है. अरुणाचल प्रदेश सीमा पर दोनों देशों की सेनाएं तैनात हैं. अब दोनों देशों के बीच और दूसरी वॉर शुरू हो गई है. इसका नाम है ‘ऑयल वॉर’. भारत और चीन के कॉमन फ्रेंड रूस के क्रूड ऑयल के लिए दोनों देशों में अलग तरीके का युद्ध शुरू हो गया है. जिसमें अभी भारत बाजी मारता हुआ दिखाई दे रहा है. अप्रैल के महीने में चीन से ज्यादा भारत ने सस्ता रूसी तेल इंपोर्ट किया है. यह आंकड़ा मई के महीने में दूसरे लेवल पर पहुंच सकता है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर भारत के ऑयल इंपोर्ट बास्केट में रूसी तेल की कितनी हिस्सेदारी हो गई है.
रूस अप्रैल में भी भारत के लिए टॉप क्रूड ऑयल सप्लायर बना हुआ है. इसका मतलब है कि भारत के ऑयल इंपोर्ट बास्केट में रूसी तेल की कितनी हिस्सेदारी 36 फीसदी हो गई है. एनर्जी कार्गो ट्रैकर वोर्टेक्सा की रिपोर्ट के मुताबिक रूस ने अप्रैल में भारतीय रिफाइनर्स को एक दिन में 1.68 मिलियन बैरल कच्चे तेल की सप्लाई की, जो मार्च में 1.61 एमबीडी के मुकाबले 4 फीसदी ज्यादा है. वहीं दूसरी ओर अप्रैल में चीन ने रूस से समुद्र के रास्ते 1.3 एमबीडी जबकि यूरोप ने प्रतिदिन 206,000 बैरल का इंपोर्ट किया है.
वैसे मार्च के मुकाबले अप्रैल में भारत का कुल क्रूड ऑयल इंपोर्ट 3.5 फीसदी गिरकर 4.6 एमबीडी हो गया. भारत के कच्चे तेल के आयात में रूस की हिस्सेदारी मार्च के 33.8 फीसदी से बढ़कर अप्रैल में 36.4 फीसदी हो गई. खास बात तो ये है कि रूस-यूक्रेन वॉर से पहले भारत रूस से कुल आयात का 0.2 फीसदी की इंपोर्ट करता था. वैसे हैवी डिस्काउंट वाले रूसी तेल के इंपोर्ट में आयात में वृद्धि हाल के महीनों में धीमी हो गई है. दिसंबर में यह तेजी 29 फीसदी थी, जो फरवरी में घटकर 26 फीसदी और मार्च में यह 1.8 फीसदी रह गई. वहीं अप्रैल में यह आंकड़ा 4 फीसदी हाग गया.
सोर्स :- ” TV9 भारतवर्ष “
