अक्टूबर 2 2023 ! इस राजनीतिक बदलाव का मानवीय असर भी हुआ. दुनिया ने मानव इतिहास की एक बड़ी त्रासदी अपनी आंखों के सामने घटित होते हुए देखी.
अफ़ग़ानिस्तान के काबुल एयरपोर्ट पर माहौल ऐसा था कि लोग देश छोड़ने के लिए हवाई जहाज के पहियों तक पर लटक गए.
ऐसा करने के पीछे दूतावास ने एक बड़ी वजह भारत सरकार से समर्थन न मिलना बताया है, हालांकि भारत सरकार ने इस पर अभी तक कोई बयान नहीं दिया है.
दूतावास के आरोपों के बाद तालिबान के प्रति भारत के रुख को लेकर सवाल उठ रहे हैं. क्या भारत किसी ऐसे दूतावास का साथ नहीं देना चाहता, जिसे तालिबान सरकार का समर्थन न हो?
दिल्ली में दूतावास के अलावा मुंबई और हैदराबाद में अफ़ग़ानिस्तान के वाणिज्य दूतावास हैं. यहां पहले की तरह कामकाज जारी रहेगा.
इस पूरे घटनाक्रम में दिल्ली दूतावास एक तरफ़ है और वाणिज्य दूतावास दूसरी तरफ़. दोनों एक दूसरे को अवैध बता रहे हैं.
दिल्ली में मौजूद अफ़ग़ानिस्तान दूतावास ने चेतावनी देते हुए कहा कि वाणिज्य दूतावास जो फैसला लेंगे, वह अफ़ग़ानिस्तान की चुनी हुई और वैध सरकार की जगह अफ़ग़ानिस्तान में मौजूद तालिबान की गैरक़ानूनी सत्ता के हितों में होगा.
वहीं वाणिज्य दूतावास का कहना है कि भले दिल्ली में दूतावास बंद हो जाए, लेकिन वे स्वतंत्र रूप से सेवा करने के लिए तैयार हैं.
इसकी वजह है कि अफ़ग़ानिस्तान के राजदूत फ़रीद मामुन्दज़ई को ग़नी सरकार ने नियुक्त किया था और वे तालिबान विरोधी हैं. उनकी ज़िम्मेदारी तालिबान सरकार ने ट्रेड काउंसलर कादिर शाह को देने की कोशिश की, जो कामयाब नहीं हो पाई.
सोर्स :-“BBC न्यूज़ हिंदी”
