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वकील ने दलील के लिए मांगे 8 मिनट, SC बोला-बात सिद्ध नहीं कर पाए तो…हर मिनट लगेगा 1 लाख रुपए जुर्माना

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25 मई 2022 | सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में 10 साल से पुराने डीजल व 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों पर प्रतिबंध के खिलाफ दाखिल याचिका को खारिज करते हुए साथ में जुर्माना लगाया है। जस्टिस एलएन राव, जस्टिस ए एस बोपन्ना और जस्टिस बीआर गवई की पीठ ने रजिस्ट्री से भी कहा कि किसी वकील से प्रभावित होने की जरूरत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता वकील अनुराग सक्सेना से कहा कि ये याचिका फालतू है। कोर्ट ने अनुराग सक्सेना से कहा कि नए वाहनों से भी कार्बन उत्सर्जन का खतरा बना हुआ है, ऐसे में पुराने वाहन तो और खतरनाक हैं।

कोर्ट ने कहा कि आपने कार्बन फुटप्रिंट के बढ़ते खतरनाक असर से पर्यावरण को खतरे के बारे में एनजीटी की चिंता और आदेश देखे हैं, फिर भी आपकी यह याचिका दुर्भाग्यपूर्ण है। कोर्ट ने गैर-जरूरी अर्जी देने पर वकील पर जुर्माना भी लगाया। याचिकाकर्ता वकील अनुराग सक्सेना ने कोर्ट से आठ मिनट देने का आग्रह किया था जिसमें उन्होंने कहा कि वह अपनी बात सिद्ध कर देंगे। बेंच ने उनकी बात मानते हुए शर्त रखी कि अगर वो अपनी दलीलों से अदालत को कायल नहीं कर पाए तो अदालत हर मिनट के लिए एक लाख रुपए के हिसाब से जुर्माना लगा देगी।

पीठ के याचिका खारिज करने का आदेश पारित करने के बाद भी वकील अनुराग सक्सेना ने बहस जारी रखी। इस पर पीठ ने कहा कि हमने पहले ही कहा था कि हम 8 लाख रुपए जुर्माना लगा सकते हैं। हालांकि, हम किसी के लिए भी कठोर होना नहीं चाहते खासकर जो सौभाग्य या दुर्भाग्य से वकील हैं, इसलिए हम इस मामले पर नरम रुख अपनाते हैं। पीठ ने मामले को बंद करने से पहले याचिकाकर्ताओं को यह भी चेतावनी दी कि अगर वह आगे से इस तरह के दुस्साहस करेंगे तो अदालत को मामले पर कड़ा रुख अपनाना होगा। फिर पीठ ने 8 लाख की जगह 50 हजार रुपए जुर्माना लगाकर छोड़ दिया।

Source;-“पंजाबकेसरी” 


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