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मध्य प्रदेश में कोरोना ने एक बार फिर से रफ्तार पकड़ ली है. पिछले तीन दिनों में हर दिन 300 से ज्यादा नए केस

ByPrompt Times

Jul 7, 2020
मध्य प्रदेश में कोरोना ने एक बार फिर से रफ्तार पकड़ ली है. पिछले तीन दिनों में हर दिन 300 से ज्यादा नए केस
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ग्वालियरभले ही कांग्रेस की सरकार को सत्ता से बेदखल हुए लगभग 110 दिन बीत गए हो, लेकिन उसके बावजूद भी कांग्रेसी कांग्रेस सरकार को बेदखल करने को लेकर सिंधिया पर तंज कसना नहीं छोड़ रहे हैं. कांग्रेस ने अब सिंधिया और उनके परिवार पर तंज कसते हुए कहा कि साल 1967 में जो उनकी दादी राजमाता सिंधिया ने किया था वही इतिहास ज्योतिरादित्य सिंधिया ने दोहराया है, लेकिन इतिहास अपने आप को फिर दोहराएगा.

कांग्रेस ने कहा कि जिस तरीके से भले ही राजमाता सिंधिया ने कांग्रेस की सरकार को गिरा दिया था, लेकिन वह सरकार 17 से 18 महीने चली थी, बाद में एक बार फिर मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सत्ता की वापसी हुई थी, ठीक उसी तरह इस उपचुनाव के बाद कांग्रेस मध्यप्रदेश में वापसी करेगी. 

वहीं कांग्रेस के तंज पर बीजेपी प्रवक्ता का कहना है कि साल 1967 में भी डीपी मिश्रा की सरकार जनता की तरफ ध्यान नहीं दे रही थी, इसलिए जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए राजमाता ने सरकार गिराई थी, वहीं कुछ घटनाक्रम तत्कालीन कांग्रेस सरकार के साथ था कमलनाथ जनता के हितों का ध्यान नहीं रख रहे थे तो सिंधिया ने सरकार गिराने में अहम भूमिका निभाई.

क्या हुआ था 1967 में?
राजनीतिक जानकारों की मानें तो 1967 में जब डीपी मिश्रा की अविभाजित मध्यप्रदेश में सरकार थी और राजमाता सिंधिया ग्वालियर से कांग्रेस की सांसद थीं, उस समय डीपी मिश्रा ने सरगुजा महाराज के यहां पुलिस भेजी इसके साथ ही पचमढ़ी में हुए युवा कांग्रेस के अधिवेशन में उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि राजे रजवाड़े नहीं चाहते हैं कि देश में कांग्रेस की सरकार रहे, उनकी सरकार इस प्रदेश में राजे-रजवाड़ों की राजशाही को खत्म कर देगी, उस अधिवेशन में राजमाता सिंधिया खुद मौजूद थीं, उन्हें यह बात नागवार गुजरी. उसी समय ग्वालियर में एक छात्र आंदोलन हुआ जिसके चलते कुछ छात्रों की मौत भी हो गई. इस विषय पर बात करने के लिए राजमाता सिंधिया डीपी मिश्रा के पास भोपाल गईं, एक तो उन्हें बड़ी मुश्किल से मुख्यमंत्री ने मिलने का समय दिया और जब वह उनसे मिली तो डीपी मिश्रा ने साफ कह दिया यदि ग्वालियर में हुए छात्र आंदोलन के बारे में बात करनी है तो कोई बात नहीं होगी, उसके अलावा कोई बात हो तो बताइए. इससे राजमाता का आक्रोश और भड़क गया और वह अपने 36 विधायकों के साथ पार्टी छोड़ दी. इसके बाद उन्होंने जनसंघ के साथ मिलकर सरकार बनाई, जनसंघ की सरकार ज्यादा दिन तक नहीं चल पाई. डेढ़ साल बाद अंतर्कलह के चलते जनसंघ की सरकार गिर गई और एक बार फिर मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार स्थापित हुई.
















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