छत्तीसगढ़

पोविडोन ऑयोडीन घोल का जाँच में फिर घटिया पाए जाने पर प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली बेनक़ाब : भाजपा

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता सिंहदेव ने कहा- जनस्वास्थ्य के आपराधिक खिलवाड़ के इस मामले में दोषियों के ख़िलाफ़ उच्चस्तरीय जाँच कर दंडात्मक कार्रवाई की जाए
रायपुर।
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता अनुराग सिंहदेव ने घटिया पोविडोन ऑयोडीन दवा की अस्पताल में आपूर्ति के नाम पर एक बार फिर छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज़ कॉर्पोरेशन (सीजीएमएससी) में हुए भ्रष्टाचार के बड़े खुलासे को लेकर प्रदेश सरकार और उसके स्वास्थ्य मंत्रालय की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला है। श्री सिंहदेव ने कहा कि यह प्रदेश के जनस्वास्थ्य के आपराधिक खिलवाड़ है और इस मामले में दोषियों के ख़िलाफ़ उच्चस्तरीय जाँच कर उन पर दंडात्मक कार्रवाई की जाए। इस मामले ने कांग्रेस के भ्रष्ट राजनीतिक चरित्र को बेनक़ाब कर दिया है

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता श्री सिंहदेव ने कहा कि दो माह पहले ही उक्त दवा की आपूर्ति करने और जाँच में अमानक पाए जाने के बावज़ूद प्रदेश सरकार की कुंभकर्णी निद्रा नहीं टूटी और इधर 12 मार्च को औषधि विभाग में जाँच के लिए भेजे गए पोविडोन ऑयोडीन के पाँच और नमूने अमानक पाए गए हैं। श्री सिंहदेव ने आरोप लगाया कि औषधि विभाग किसी तरह की कार्रवाई न कर मामले को दबाने में लगा है। श्री सिंहदेव ने कहा कि प्रदेश में जबसे कांग्रेस की सरकार सत्ता में आई है, हर मोर्चे पर भ्रष्टाचार के मामले नित-नई मिसालें क़ायम कर रहे हैं। सीजीएमएससी द्वारा राज्य के सरकारी अस्पतालों में भेजी गई पोविडोन ऑयोडीन एंटीसेप्टीक सॉल्यूशन (घोल) का दो बार जाँच में घटिया पाया जाना प्रदेश सरकार और उसके स्वास्थ्य मंत्रायल के निकम्मेपन की पराकाष्ठा है। श्री सिंहदेव ने कहा कि प्रदेश सरकार अपने इस अक्षम्य कृत्य की ज़वाबदेही से बरी नहीं हो सकेगी। अग़र इस दवा के एक लंबे अर्से से बेअसर होने की शिकायत सामने नहीं आती तो स्वास्थ्य मंत्रालय के इस भ्रष्टाचरण पर पर्दा पड़ा रहता और प्रदेश के लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने वाले भ्रष्ट अफ़सर मालामाल होते रहते।

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता श्री सिंहदेव ने कहा कि उक्त दवा की आपूर्ति हिमाचल प्रदेश के नालागढ़ स्थित  कम्पनी ने की थी और उसे भी जाँच के दायरे में लाकर उसके ख़िलाफ़ कोर्ट में चालान ज़रूर पेश किया गया है, लेकिन सारे तथ्यों का खुलासा होना चाहिए। श्री सिंहदेव ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्रालय अपनी कार्यप्रणाली के चलते लगातार सवालिया दायरे में है और स्वास्थ्य मंत्री को इसकी नैतिक ज़िम्मेदारी लेकर प्रदेश सरकार से इस्तीफ़ा देना चाहिए। श्री सिंहदेव ने कहा कि सत्तावादी अहंकार में चूर प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य मंत्री ने प्रदेश को स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर सिवाय झुनझुना थमाने के और स्वास्थ्य विभाग के अफ़सरों ने भ्रष्टाचार करने के और क्या किया है, यह इस घटिया घोल की ख़रीदी के मामले से साफ़ हो चला है। श्री सिंहदेव ने कहा कि सीजीएमएससी के भ्रष्ट अधिकारी अब अपनी ज़िम्मेदारियों से मुँह चुरा रहे हैं और कोरोना वैक्सीन के टीकाकरण को लेकर अपने राजनीतिक दुराग्रह की पराकाष्ठा कर चुके मंत्री सिंहदेव का रवैया यह साबित करता है कि जनस्वास्थ्य जैसे अत्यंत संवेदनशील मुद्दे पर भी शर्मनाक लापरवाही बरती जा रही है।

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