• June 5, 2026 7:39 am

दिल्ली-एनसीआर में प्रॉपर्टी के बाजार ने पकड़ी रफ्तार, इन कारणों से सुधरी हालत

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नहीं बिक पाए मकानों के बढ़ते भंडार के चलते कुख्यात दिल्ली-एनसीआर के प्रॉपर्टी बाजार में बीते कुछ सालों में हालात तेजी से बेहतर हुए हैं. एक हालिया रिपोर्ट बताती है कि बीते 6 सालों के दौरान दिल्ली-एनसीआर में नहीं बिक पाए मकानो के भंडार यानी अनसोल्ड इन्वेंट्री में आधे से ज्यादा की कमी आई है.

अब इतने बचे हैं नहीं बिक पाए मकान

प्रॉपर्टी कंसल्टेंट एनारॉक की एक रिपोर्ट के अनुसार, साल 2018 की पहली तिमाही में अनसोल्ड इन्वेंट्री तकरीबन 2 लाख थी, जो साल 2024 की पहली तिमाही में कम होकर 86,420 पर आ गई है. इस तरह पिछले 6 सालों के दौरान ऐसे मकानों की संख्या 57 फीसदी कम हुई है.

नोएडा-ग्रेटर नोएडा में सबसे तेज सुधार

दिल्ली- एनसीआर में सबसे ज्यादा 33,326 मकानों की अनसोल्ड इन्वेंट्री गुरुग्राम में है. गुरुग्राम में पिछले 6 सालों में ऐसे मकानों की संख्या में 37 फीसदी की गिरावट आई है. ग्रेटर नोएडा में अनसोल्ड इन्वेंट्री में 18,668 मकान बचे हैं. यहां अनसोल्ड स्टॉक में 70 फीसदी की भारी कमी आई है. नोएडा में नहीं बिक पाए मकानों की संख्या बीते 6 सालों में 71 फीसदी कम होकर 7,451 पर आ गई है.

दक्षिण के बाजारों का हाल

दिल्ली-एनसीआर में अनसोल्ड इन्वेंट्री के कम होने की रफ्तार किसी भी अन्य बाजार की तुलना में बेहतर रही है. दक्षिण के बाजारों जैसे- बेंगलुरू, हैदराबाद और चेन्नई में नहीं बिक पाए मकानों का स्टॉक सिर्फ 11 फीसदी कम हुआ है. इन बाजारों में 2018 की पहली तिमाही में नहीं बिके मकानों की संख्या 1.96 लाख थी, जो कम होकर मार्च 2024 के आखिर में करीब 1.76 लाख यूनिट रह गई है.

सबसे कम यहां आई गिरावट

पूर्वी भारत के कोलकाता में इस दौरान खाली पड़े मकानों की संख्या 49,560 यूनिट से 41 फीसदी कम होकर 29,278  इकाई रह गई है. वहीं पश्चिम भारत के मुंबई महानगर क्षेत्र और पुणे जैसे बाजारों में अनसोल्ड इन्वेंट्री बीते 6 सालों के दौरान सबसे कम 8 फीसदी कम हुई है. साल 2018 की पहली तिमाही तक इन बाजारों में 3 लाख 13 हजार 485  मकान नहीं बिके थे. मार्च 2024 तिमाही में इनकी संख्या कम होकर 2 लाख 89 हजार 677 रह गई है.

इस कारण आया सबसे बड़ा फर्क

एनारॉक ग्रुप के वाइस चेयरमैन संतोष कुमार के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में नहीं बिक पाए मकानों की संख्या तेजी से कम होने का बड़ा कारण डेवलपर्स की ओर से नए मकानों की कम सप्लाई है. 2018 की पहली तिमाही से 2024 की पहली तिमाही के बीच दिल्ली-एनसीआर में करीब 1.81 लाख नए घरों की आपूर्ति हुई है, जबकि बेंगलुरू, हैदराबाद और चेन्नई में सप्लाई का आंकड़ा 6.07 लाख यूनिट का रहा है. इसी तरह पश्चिम क्षेत्र के मुंबई और पुणे में इस दौरान 8.42 लाख नए मकानों की सप्लाई हुई है.

 

 

 

 

 

source abp news


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