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निशाने पर नियम-अफगानिस्तान में तालिबानी कब्जे की कवरेज के दौरान प्रेग्नेंट हुई न्यूजीलैंड की पत्रकार, अपने देश में एंट्री बैन- तालिबान से मांगनी पड़ रही मदद

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31 जनवरी2022 |   न्यूजीलैंड की एक प्रेग्नेंट जर्नलिस्ट चार्लोट बेलिस इन दिनों अफगानिस्तान में फंसी हुईं हैं। न्यूजीलैंड में कोविड रूल्स बेहद सख्त हैं और इनकी वजह से बेलिस जैसे कई किवी नागरिक दूसरे देशों में मौजूद हैं, लेकिन इन्हें अपने देश लौटने की मंजूरी नहीं मिल रही। अब इन लोगों ने अपना एक संगठन ‘ग्राउंडेड किवीज’ बना लिया है और इसके जरिए ये जेसिंडा अर्डर्न सरकार का विरोध कर रहे हैं। बेलिस को फिलहाल, अफगानिस्तान की तालिबान हुकूमत ने मदद मुहैया कराई है।

क्या है मामला
बेलिस 7 महीने में दूसरी बार खबरों में हैं। पिछले साल वो तब अफगानिस्तान गईं थीं, जब वहां से अमेरिका अपने सैनिकों को निकाल रहा था। वहां तालिबान का कब्जा हो चुका था और उस दौरान बेलिस अलजजीरा टीवी चैनल के लिए काम कर रहीं थी। इस चैनल का हेडक्वॉर्टर कतर में है। तब सिर पर दुपट्टा डाले बेलिस ने तालिबान से महिलाओं और लड़कियों को हक देने के बारे में तालिबान नेताओं से सख्त सवाल किए थे। अब वो प्रेग्नेंट हैं और उनके देश की सरकार उन्हें देश लौटने की मंजूरी देने को तैयार नहीं है।

चार्लोट बेलिस अलजजीरा टीवी चैनल के लिए काम करती थीं।

चार्लोट बेलिस अलजजीरा टीवी चैनल के लिए काम करती थीं।

कलम के जरिए बताई दर्द की दास्तां
बेलिस ने ‘द न्यूजीलैंड हेराल्ड’ में एक कॉलम लिखकर बताया कि वे कितने मुश्किल दौर से गुजर रही हैं। 35 साल की बेलिस ने लिखा- मैं अफगानिस्तान में फंस गई हूं और यहां तालिबान मेरी मदद कर रहे हैं। इसकी वजह हमारे देश में लागू कोविड और क्वारैंटाइन रूल्स हैं।

ग्राउंडेड किवीज संगठन के प्रवक्ता मार्टिन न्यूबेल ने कहा- बेलिस ही क्यों, न्यूजीलैंड के सैकड़ों लोग दूसरे देश में फंसे हुए हैं। हम आवाज उठा रहे हैं, लेकिन कोई सुनने तैयार नहीं है। क्या यही सभ्यता और मानवाधिकार हैं?

बेलिस का कहना है कि न्यूजीलैंड सरकार उन्हें इमरजेंसी तौर पर मदद करे।

बेलिस का कहना है कि न्यूजीलैंड सरकार उन्हें इमरजेंसी तौर पर मदद करे।

नियमों का सख्ती से पालन
न्यूजीलैंड की आबादी करीब 50 लाख है। महामारी के दौर में यहां सिर्फ 52 लोगों की मौत हुई। पड़ोसी देश ऑस्ट्रेलिया में 4 हजार लोग संक्रमण से जान गंवा चुके हैं। न्यूजीलैंड सरकार ने जो नए नियम लागू किए हैं, उनके मुताबिक देश लौटने वाले लोगों को 10 दिन अपने खर्च पर होटल में क्वारैंटाइन रहना होता है। ये होटल्स आर्मी ऑपरेट कर रही है। होटल गिनचुने हैं, इसलिए बैकलॉग बढ़ता जा रहा है।

कतर में नहीं मिल सकती एंट्री
बेलिस मई में बच्चे को जन्म देंगी। पिछले साल सितंबर में वो कतर गईं थीं। यहां अलजजीरा का हेडक्वॉर्टर है। यहीं उन्हें पता चला कि वो अपने पार्टनर और फ्रीलांस जर्नलिस्ट जिम हुलीब्रोक के बच्चे की मां बनने वाली हैं। जिम न्यूयॉर्क टाइम्स के लिए काम करते हैं। परेशानी ये है कि कतर में बिन ब्याही मां बनना कानूनन अपराध है। लिहाजा, कतर में तमाम सुविधाएं होने के बावजूद बेलिस वहां नहीं रह सकतीं। नवंबर में उन्होंने नौकरी भी छोड़ दी थी। जिम बेल्जियम के नागरिक हैं, लेकिन बेलिस ज्यादा वक्त वहां भी नहीं रह सकतीं। यही वजह है कि उन्हें अफगानिस्तान लौटना पड़ा। तालिबान ने भी इसके लिए मंजूरी दे दी।

सितंबर में रिपोर्टिंग के दौरान काबुल में मौजूद बेलिस।

सितंबर में रिपोर्टिंग के दौरान काबुल में मौजूद बेलिस।

तालिबान ने झूठ बोलने को कहा
बेलिस कहती हैं- तालिबान ने मुझे अफगानिस्तान आने की मंजूरी तो दे दी, लेकिन एक हिदायत के साथ। उन्होंने मुझसे कहा- आप किसी को यह न बताएं कि आप शादीशुदा नहीं हैं। मैंने न्यूजीलैंड सरकार को 59 डॉक्यूमेंट्स भेजे और कहा कि वो मुझे इमरजेंसी केस के तहत लौटने की मंजूरी दें। लेकिन, लॉटरी सिस्टम की वजह से यह मुमकिन नहीं हो सका।

वहीं, न्यूजीलैंड सरकार का कहना है कि बेलिस की एप्लीकेशन सही नहीं थी, हमारा स्टाफ उन्हें नई एप्लीकेशन फाइल करने में मदद कर रहा है। वहीं, बेलिस का कहना है- अफगानिस्तान में प्रेन्नेंट होना मौत की सजा से कम नहीं है। यहां मेडिकल फेसेलिटीज न के बराबर हैं। पिछले साल भी न्यूजीलैंड की एक प्रेग्नेंट महिला अमेरिका में इन्हीं नियमों की वजह से फंस गई थी। ग्राउंडेड किवीज ने सरकार के नियमों को कोर्ट में चुनौती दी है। इस पर 14 फरवरी को सुनवाई होगी।

Source;-“दैनिक भास्कर”


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