नवंबर 10 2023 ! ख़बर के मुताबिक़, वह इन देशों को बेचे लड़ाकू और मालवाहक हेलिकॉप्टरों के इंजन वापस मांग रहा है.
दरअसल, जबसे रूस ने जंग छेड़ी है, तभी से हेलिकॉप्टर उसके अभियान का अहम हिस्सा रहे हैं. मगर युद्ध के शुरुआती दिनों में उसे 100 से ज्यादा हेलिकॉप्टर गंवाने पड़े थे.
रूस हथियारों का दूसरा सबसे बड़ा कारोबारी देश है और उसने कई दशकों की मेहनत के बाद यह कारोबार खड़ा किया है.
मगर यूक्रेन के साथ छेड़ी गई जंग तीसरे साल में प्रवेश कर गई है और लगातार खर्च हो रहे गोला-बारूद ने उसके सामने एक बड़ी चुनौती पैदा कर दी है.
द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक़, रूस ने हथियारों और स्पेयर पार्ट का निर्माण तेज़ किया है, मगर इससे उसकी ज़रूरतें पूरी नहीं हो पा रही हैं. ऐसे में उसे चुपके से अपने ग्राहकों से वह सब ख़रीदना पड़ रहा है, जो उसने बेचा था.
इसके लिए रूस ने अपने उन सहयोगी देशों का रुख़ किया है, जिन्होंने उससे विमान, हेलिकॉप्टर, मिसाइल और डिफ़ेंस सिस्टम ख़रीदे थे.
वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अपने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि इस साल रूस ने पाकिस्तान, बेलारूस और ब्राज़ील को बेचे सैन्य और मालवाहक हेलिकॉप्टरों के इंजन वापस लेने के लिए बातचीत की.
वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि रूस ने पाकिस्तान से कम से कम चार एमआई-35एम इंजन वापस मांगे हैं.
हालांकि, अख़बार के मुताबिक़, पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय का कहना है कि इस सम्बंध में रूस ने उनसे कोई संपर्क नहीं किया है.
इसी तरह रूस ने ब्राज़ील से उन हेलिकॉप्टरों के 12 इंजन मांगे थे, जिन्हें पिछले साल डीकमीशन (सेवाओं से हटाना) कर दिया था.
ब्राज़ील के विदेश मंत्रालय के अधिकारी ने इस पर बताया है कि इस मांग को इसलिए नहीं माना गया क्योंकि ब्राज़ील की नीति है कि वह युद्ध के दौरान किसी भी पक्ष को हथियार नहीं भेजता.
वहीं, रूस को उसके सबसे क़रीबी सहयोगी बेलारूस द्वारा छह एमआई-26 ट्रांसपोर्ट हेलिकॉप्टरों के इंजन वापस बेचने की ख़बर है, मगर इस पर बेलारूस ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.
सोर्स :-“BBC न्यूज़ हिंदी”
