26 फरवरी 2022 | रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे विवाद व युद्ध का प्रत्यक्ष असर हमारे जिले में घरों के किचन तक पहुंच चुका है। जिसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। क्योंकि 15 किलो क्षमता वाले सोयाबीन तेल के टीन के दाम 10 दिन में ही 250 रुपए बढ़ गए। व्यापारियों का तर्क है कि इंटरनेशनल मार्केट पर असर पड़ रहा है, जब भी ऐसी स्थिति आती है, यहां तेल सहित अन्य चीजों के दाम बढ़ जाते हैं। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की बढ़ती कीमत व्यापारिक दृष्टिकोण के लिहाज से चुनौतीपूर्ण है। तेल के तीन सबसे बड़े उत्पादक देश सऊदी अरब, रूस और अमेरिका हैं।
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन के अनुसार रूस, यूक्रेन और अन्य पूर्वी यूरोपीय देशों में माल का आयात- निर्यात होता है। ऐसे में आवाजाही, भुगतान और तेल की कीमतों पर असर पड़ना स्वाभाविक है। फिलहाल आवक, स्टॉक, ट्रांसपोर्टिंग का हवाला देकर व्यापारियों ने तेल के दाम बढ़ा दिए हैं। कोरोनाकाल में खाद्य तेल की कीमती लगातार बढ़ रही है। पिछले दो साल से सोयाबीन तेल, सरसों तेल मूगफली तेल के दाम में तेजी से उछाल आए हैं। इस दौरान डीजल के दाम बढ़ने के कारण भी किराया भाड़ा बढ़ गया है।
क्वालिटी व ट्रांसपोर्टिंग चार्ज अनुसार दाम तय
शुक्रवार को भास्कर टीम ग्राहक बनकर शहर के चार किराना दुकानों में तेल लेने पहुंची व मौके पर उपस्थिति व्यापारियों, ग्राहकों से चर्चा कर वास्तविकता जानी तब यह सच्चाई सामने आई कि बीएस गोल्ड 15 किलो तेल एक सप्ताह पहले 2250- 2300 रुपए में मिल रहा था। जो अब 2500- 2530 में मिल रहा है। इसकी कई क्वालिटी है, सभी के दाम बढ़ दिए गए हैं।
टिन में भरा 15 किलो रिफाइंड सोयाबीन तेल पहले 2100 में मिल रहा था। जो अब 2300 में मिल रहा है। यह थोक की स्थिति है, वहीं चिल्हर में तेल में प्रतिकिलो 5 से 10 रुपए की बढ़ोत्तरी हुई है। क्वालिटी व ट्रांसपोर्टिंग चार्ज अनुसार व्यापारी अलग-अलग दाम तय करते है। व्यापारियों की मानं तो फिलहाल खाद्य सामग्री व तेलों के दाम में कमी आने की उम्मीद नहीं है।
एक साल में खाने वाला तेल प्रति किलो 75 रु. महंगे
कोरोना व लॉकडाउन के चलते लोगों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ ही रहा था। वहीं अब इस नए संकट से आम आदमी एक बार फिर प्रभावित हो रहा है। तब से अब तक तेल के दाम बढ़ते क्रम पर ही है। एक साल में सोयाबीन, सरसों के तेल प्रति किलो 75 रुपए तक महंगे हा़े गए। जिससे हर घर का बजट गड़बड़ा गया है।
इधर 10 दिन पहले सोयाबीन तेल का टीन 2250 में मिल रहा था, अब 2500 में मिल रहा है। बुधवारी बाजार स्थित किराना दुकान में पहुंचे ग्राहकों को व्यापारी बताते रहे कि टीन में भरा 15 किलो सोयाबीन तेल 2480-2500 रुपए में मिल रहा है। जो दो दिन पहले 2420 में मिल रहा था। वहीं 10 दिन पहले 2250 रुपए में मिल रहा था। मूंगफली तेल 2600-2700, सरसो तेल 2900-3000 तक के आसपास प्रति टीन मिल जाएगा। वहीं चिल्हर में प्रति किलो के हिसाब से और महंगा पड़ेगा।
जिले में मायने व असर क्या- जिले की जनसंख्या लगभग 10 लाख है। इस लिहाज से औसत लगभग 3 लाख परिवारों पर महंगाई का भार पड़ रहा है। अधिकांश परिवार दुकानों से घर के लिए तेल ले जाते है।
गृहणियों ने कहा- घर चलाना अब मुश्किल
मान लीजिए 5 सदस्यों के एक परिवार में औसतन हर महीने न्यूनतम 5-6 किलो तेल की खपत हर महीने होती है। त्योहारी सीजन में यह खपत बढ़कर डेढ़ या दोगुनी तक हो जाती है। गर्मी में यह खपत 4 किलो के आसपास होती है तो बारिश में 5 से 6 किलो तक पहुंच जाती है। इस तरह से दाम बढ़ने से हर एक परिवार पर भार बढ़ गया है।
शादी सीजन के दौरान स्थानीय स्तर पर भी व्यापारी दाम बढ़ा देते है। गृहणी पुष्पा बाई साहू, केसरी बाई, उषा, परमेश्वरी, रुक्मणी बाई ने बताया कि खाद्य सामग्री के दाम में दिनोंदिन बढ़ोत्तरी हो रही है। स्वाभाविक है बजट गड़बड़ा गया है। पहले की तुलना में ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है। खपत उतनी हो रही लेकिन दाम बढ़ ही रहे है।
Source;-“दैनिक भास्कर”
