29-अप्रैल-2022 | रेडी टू ईट का निर्माण और वितरण कर रही महिला स्वसहायता समूहों से काम वापस लेने के आदेश को चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं को गुरुवार को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। साथ ही 26 नवंबर 2021 की अधिसूचना को कोर्ट ने वैध ठहराया। महिला स्वसहायता समूहों ने इसे लेकर 285 याचिकाएं हाईकोर्ट में प्रस्तुत कर सरकार के निर्णय और काम को बीज निगम व प्राइवेट कंपनी को देने के निर्णय को गलत बताया था।
मां संतोषी स्वसहायता समहू, कालिका महिला स्वसहायता समूह सहित 285 अन्य ने हाईकोर्ट में याचिकाएं प्रस्तुत की थीं, इसमें आईसीडीएस योजना के तहत तैयार भोजन और वितरण का काम छत्तीसगढ़ बीज विकास निगम से कराने के लिए राज्य सरकार द्वारा जारी अधिसूचना को चुनौती दी।
राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता सतीश चंद्र वर्मा ने काेर्ट को बताया कि अधिसूचना बच्चों और गर्भवती महिलाओं के कल्याण के लिए जारी की गई है। इससे लाभार्थियों को अधिक पौष्टिक और स्वस्थ भोजन मिलेगा। अधिसूचना सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ नहीं है। सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने सभी याचिकाएं खारिज कर दीं।
लोअर ज्युडिशियरी परीक्षा में महिलाओं को आरक्षण पर कोर्ट ने शासन से मांगा जवाब
छत्तीसगढ़ के लोअर ज्युडिशियरी परीक्षा में महिलाओं को आरक्षण देने की मांग करते हुए दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने शासन से जवाब मांगा है। याचिका में हाईकोर्ट को भी पक्षकार बनाया गया है। मामले की सुनवाई जस्टिस गौतम भादुड़ी और जस्टिस एनके चंद्रवंशी की डिवीजन बेंच में हुई।
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (पीएससी) के लॉ ऑफिसर के पद से सेवानिवृत्त एलके मढ़रिया ने अधिवक्ता जीतेंद्र नाथ नंदे के माध्यम से जनहित याचिका दायर कर कहा कि राज्य में होने वाली नियुक्तियों में छत्तीसगढ़ की स्थानीय निवासी महिला उम्मीदवारों को रिक्त पदों में 30 प्रतिशत और 10वर्ष की अधिकतम आयु सीमा में छूट है। लेकिन छत्तीसगढ़ शासन के विधि विभाग द्वारा व्यवहार न्यायाधीश की भर्ती में छत्तीसगढ़ सिविल सेवा के नियमों का पालन नहीं हो रहा है। न ही महिला आरक्षण का जो कि छत्तीसगढ़ की स्थानीय निवासी महिलाओं को देना था। याचिका में विधि विभाग से महिलाओं को आरक्षण का लाभ दिलाए जाने की मांग की। साथ ही बताया है कि राज्य की सरकार एक नया नियम 5 वर्ष का छूट दिए जाने की लाई है इसे भी दिलाए जाने मांग की। इस याचिका में हाईकोर्ट को भी पक्षकार बनाकर लोवर ज्युडिश्यरी भर्ती नियम 2006 में संशोधन करने की मांग की गई। साथ ही धारा 6 और 7 में स्थानीय निवासियों को छूट देने और स्थानीय निवासी महिलाओं को 30 प्रतिशत का लाभ दिए जाने की मांग की।
परसा कोल ब्लॉक : हाईकोर्ट ने सरकार से तलब की रिपोर्ट
हाईकोर्ट में परसा कोल ब्लॉक भूमि अधिग्रहण को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई में आधी रात की गई पेड़ों की कटाई का मुद्दा उठाया गया। कोर्ट ने राज्य सरकार से रिपोर्ट तलब की है। अगली सुनवाई 4 मई को होगी।
मंगल साय, ठाकुर राम, पानिक राम ने हाईकोर्ट में याचिका प्रस्तुत की है। इस याचिकाओं में लगाए गए स्टे आवेदन और संशोधन आवेदन पर गुरुवार को चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच में सुनवाई होनी थी। सीजे की बेंच उपलब्ध नहीं होने के कारण जस्टिस गौतम भादुड़ी और जस्टिस एनके चंद्रवंशी की डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई।
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव श्रीवास्तव और अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव ने कहा कि याचिकाओं में कोल बेयरिंग एक्ट को भी चुनौती दी गई है। अधिग्रहित की गई जमीन किसी निजी कंपनी को खनन के लिए नहीं दी जा सकती। जमीन का अधिग्रहण राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम के नाम पर हुआ लेकिन जमीन अब अडानी की स्वामित्व वाली कंपनी राजस्थान काॅलरी को सौंपी जा रही है।
कोर्ट को बताया- विभाग ने की है पेड़ों की कटाई
राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम और राजस्थान काॅलरी (अडानी) की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. निर्मल शुक्ला ने कहा कि पेड़ों की कटाई कंपनी ने नहीं वन विभाग ने की है। खदान को सभी तरह की वन पर्यावरण अनुमति प्राप्त है।
इस पर कोर्ट ने यह पूछा कि यदि भूमि अधिग्रहण निजी कंपनी के हाथ जाने के कारण अवैध साबित होता है, तो इन कटे हुए पेड़ों को क्या पुनर्जीवित किया जा सकता है? अधिग्रहण को दी गई चुनौती गंभीर विषय है और इसके समाप्त होने पर वन्य एवं पर्यावरण अनुमतियां अपने आप प्रभावहीन हो जाएंगी।
Source:-दैनिक भास्कर
