• June 5, 2026 4:49 am

ऑर्गेनिक खेती करने किसानों को बताए तरीके-किसान भागीदरी-प्राथमिकता हमारी अभियान की शुरुआत, जैविक कृषि को प्रोत्साहन

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29-अप्रैल-2022 | कृषि विज्ञान केन्द्र अंजोरा एवं आत्मा परियोजना के संयुक्त तत्वावधान में आजादी का अमृत महोत्सव के तहत किसान सम्मेलन का आयोजित किया गया। इसे किसान भागीदारी-प्राथमिकता हमारी अभियान नाम दिया गया।

वेटरनरी कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में जैविक खेतों को प्रोत्साहित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य रूप से पूर्व विधायक प्रतिमा चंद्राकर, कामधेनु विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एनपी दक्षिणकर, जिला पंचायत अध्यक्ष शालिनी यादव, प्रोफेशनल कांग्रेस के अध्यक्ष क्षितिज चन्द्राकर मौजूद थे।

कार्यक्रम का लाइव उद्घाटन, केंद्रीय मंत्री भी जुड़े
इस कार्यक्रम का लाइव उद्घाटन किया गया। केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने इसका उद्घाटन किया। साथ ही कृषि के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों, प्रयोग की विस्तार से जानकारी दी। अंजोरा में सरस्वती पूजा उपरांत कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया। इसके बाद विश्वविद्यालय, कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य विभागों एवं इफको उर्वरक द्वारा लगाएं गये प्रदर्शनी का अवलोकन किया गया। चंद्राकर ने कहा कि महिलाएं कृषि में आगे हैं।

जैविक खेती आज पूरे देश में की जा रही है कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ. दक्षिणकर ने प्रदेश की सुराजी ग्राम योजना को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि किसान प्राकृतिक एवं जैविक खेती की ओर आकृष्ट हो रहे हैं। साथ ही उन्होंने गोमूत्र आधारित जीवामृत, जैविक कीटनाशी एवं ग्रोथ प्रमोटर को किसानों के बीच लोकप्रिय करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि जैविक खेती से जमीन की उर्वरक शक्ति खत्म नहीं होती। रबी और खरीफ दोनों की फसल ली जा सकती है। इससे फायदा होगा।

रासायनिक खेती के बताए गए नुकसान
विश्वविद्यालय के निदेशक डॉ. आरपी तिवारी ने रासायनिक खेती के मनुष्य स्वास्थ्य पर होने वाले दुष्प्रभाव से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि लगातार रासायनिक खाद, बीज, उर्वरक के उपयोग से जमीन को नुकसान पहुंचता है। इससे मानव स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है। इसलिए जैविक जैविक खेती को महत्वपूर्ण बताया। इससे फायदा भी होता है। इस अवसर पर विशेष रूप से डॉ. एसके तिवारी, डॉ. एसके थापक, डॉ. विकास खुणे आदि मौजूद थे।

Source:-दैनिक भास्कर


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