06 मई 2022 | जयपुर जिले के अजीत सिंह ढिल्लो के संघर्ष और सफलता की कहानी हर किसी के लिए प्रेरणादायक है। रिटायरमेंट के बाद उन्होंने मॉडल गोट फार्म तैयार किया। आज 80 साल के ढिल्लो का टर्न ओवर करीब 1 करोड़ का है।जयपुर के रहने वाले अजीत सिंह ढिल्लो 20 साल पहले भारत सरकार के एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट से रिटायर हो गए थे।
रिटायरमेंट के बाद गोट फॉर्मिंग का काम करने की सोची। 70 साल की उम्र में करीब 10 साल पहले जयपुर के चीथवाड़ी के पास चक दगवाड़ा में सिरोही नस्ल की 60 बकरियों के साथ गोट फॉर्म शुरू किया था। धीरे-धीरे इनकी संख्या बढ़ती गई। कोरोना काल में करीब 1 हजार बकरियां बेच दी थी। अभी सोजत नस्ल की 300 बकरी और बकरे हैं।
गोट फार्मिंग बना मुनाफे का सौदा, लेकिन 24 घंटे निगरानी जरूरी
बड़े पैमाने पर गोट फार्मिंग मुनाफे का सौदा है लेकिन यह काम पूरा डेडिकेशन और मैनेजमेंट मांगता है। फीड मैनेजमेंट से लेकर हर चीज की 24 घंटे निगरानी करनी होती है। अजीत सिंह ढिल्लो का कहना है कि गोट फार्म पर 24 घंटे निगरानी रखनी होती है। चारा और दाना खिलाने का शिड्यूल मैंटेन करना होता है। बीमार जानवर की पहचान करना बड़ा मुश्किल है। यह काम राउंड द क्लॉक करना होता है। तभी यह प्रोफिट का सौदा बनता है।
शेड बनाने पर 15 लाख खर्च, सरकार देती है 50 लाख की सब्सिडी
सरदार गोट फार्म पर अभी 300 बकरियां हैं, जल्द ही यह संख्सा और बढ़ने वाली है। अजीत सिंह ने बताया कि शेड बनाने का खर्च करीब 15 लाख रुपए आता है। कोरोना से पहले 1000 तक संख्या पहुंच गई थी लेकिन कोरोना काल में डिमांड में आई कमी के काफी मात्रा में बकरे-बकरियों को बेच दिया गया।
गोट फार्मिंग को भारत सरकार ने नेशनल लाइव स्टॉक मिशन में शामिल किया है। केंद्र सरकार की स्कीम के तहत गोट फार्मिंग का बिजनेस शुरू करने पर 50 लाख तक की सब्सिडी मिलती है। इसके लिए भारत सरकार के पशुपालन विभाग की वेबसाइट पर जाकर अप्लाई किया जा सकता है। राजस्थान सरकार का पशुपालन विभग इस स्कीम को कॉर्डिनेट करता है।
Source;- ‘’दैनिक भास्कर’
