28 दिसंबर 2023 ! पुतिन सामान्य तौर पर अपने समकक्षों से ही मुलाक़ात करते हैं लेकिन इस परंपरा को तोड़ उन्होंने भारत के विदेश मंत्री से मुलाक़ात की.
जयशंकर से पुतिन की मुलाक़ात को इसीलिए ख़ास माना जा रहा है. जयशंकर के लिए रूस कोई अनजाना मुल्क नहीं है. वह रूस में भारत के राजदूत भी रह चुके हैं.
पुतिन ने एस जयशंकर से मुलाक़ात के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी को रूस आने का निमंत्रण दिया.
बैठक के दौरान दोनों ही नेताओं के बीच अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम के बीच भारत-रूस संबंध, कारोबार और यूक्रेन के मुद्दे पर भारत के रुख़ की चर्चा हुई.
रूस ने इस बात पर जोर दिया है कि दोनों देशों के बीच कारोबार केवल तेल, कोयला और ऊर्जा से संबंधित उत्पादों तक ही सीमित नहीं है बल्कि हाइटेक मामलों में भी संबंध आगे बढ़ रहे हैं.
पुतिन ने कहा, “हमें ये बताते हुए ख़ुशी हो रही है कि मौजूदा समय में दुनिया में चल रही अशांति के बीच एशिया में हमारे पारंपरिक दोस्त भारत और भारत के लोगों के साथ संबंधों का विस्तार हो रहा है.”
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच व्यक्तिगत संबंध भी अच्छे हैं. भारत ने भी अमेरिकी दबाव को नकारते हुए रूस से एस-400 मिसाइल सिस्टम ख़रीदा था.
भारत में आम चुनाव हैं. हम भारत में अपने दोस्तों की सफलता की कामना करते हैं. हमारा मानना है कि हम किसी भी राजनीतिक परिदृश्य में हमारे पारंपरिक संबंधों को बरकरार रख पाएंगे.”
पीएम मोदी ने जयशंकर के माध्यम से पुतिन को एक पत्र भेजा है.
जयशंकर ने पुतिन से कहा, ” वो (पीएम मोदी) अगले साल रूस की यात्रा को लेकर आशान्वित हैं. मैं आश्वस्त हूं कि हम बैठक की ऐसी तारीख़ तय कर पाएंगे जो दोनों देशों के राजनीतिक कैलेंडर के हिसाब से ठीक हो.”
रूस में भी अगले साल राष्ट्रपति चुनाव होने जा रहे हैं. ऐसा माना जा रहा है कि पुतिन पांचवीं बार भी राष्ट्रपति बन सकते हैं.
पुतिन आम तौर पर दूसरे देशों के मंत्रियों के साथ नहीं मिलते हैं लेकिन पिछले समय में उन्होंने अपवाद दिखाए हैं.
इसी साल फ़रवरी में रूस में ‘अफ़ग़ानिस्तान पर सुरक्षा वार्ता’ हुई थी, जिसमें कई देशों के अधिकारियों के साथ भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल भी शामिल हुए थे. इस बैठक के बाद निजी तौर पर भी डोभाल और पुतिन की मुलाक़ात हुई थी.
अब पुतिन का जयशंकर के साथ मिलना भी उसी परंपरा के टूटने का हिस्सा है.
जेएनयू के चांसलर और पूर्व विदेश सचिव कंवल सिबल ने एक ट्वीट में कहा, “ये अच्छा है. पुतिन कभी कभार ही विदेश मंत्रियों से मिलते हैं. ये सोच समझकर उठाया गया क़दम है और ये दिखाता है कि नए भूराजनितिक परिदृश्य में भारत रूस को कितना महत्व देता है.”
सोर्स :-“BBC न्यूज़ हिंदी”
