30 मई 2023 ! पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति कैसे हुई यह ऐसी पहेली है, जिसे आज भी सुलझाने के प्रयास हो रहे हैं. इस पर कई सिद्धांत हैं जिनके समर्थन में कुछ अलग तरह के प्रमाण हैं लेकिन ऐसा कुछ नहीं मिला है कि जो निर्णायक तौर पर किसी सिद्धांत को प्रमाणिक सिद्ध कर सके और बाकी को खारिज कर सके. यह वजह है कि यह पहेली अब भी एक खुला सवाल है. इससे जुड़े कई सवाल हैं जिनका जानना बहुत जरूरी है इनमें से एक यह भी है कि दुनिया में पहले एक कोशिकीय जीव आए या फिर वायरस. सवाल अजीब सा लगता है लेकिन आइए जानते हैं कि इस बारे में क्या कहता है विज्ञान.
इस पड़ताल में एक अहम पहलू जीवाश्म होते हैं. जीवाश्म पौधों और जानवरों के विकासक्रम और उद्भव के बारे में बहुत प्रमुख प्रमाण होते हैं, लेकिन जहां तक पुरातन सूक्ष्मजीवों का सवाल है, उनके बहुत ही कम जीवाश्म उपलब्ध हैं. इसलिए वैज्ञानिक आधुनिक जीवाश्म के अध्ययन के आधार पर मत विकसित करते हैं और उनसे सिद्धांत बनाने का प्रयास करते हैं. यूनिवर्सिटी ऑफ कनेक्टिकट के एमेरिटस ऑफ माइकोबायोलॉजी के प्रोफेसर केनेथ नॉल ने बैक्टीरिया और आर्किया का बरसों तक अध्ययन किया और शुरुआती जीवन से संबंधित कई सवालों के जवाब उन्हें नहीं मिले
जीवाश्म प्रमाणों के आधार पर हमारे वैज्ञानिकों को यह तो पता चल गया कि पौधों और जानवरों से काफी पहले एकल कोशिकीय सूक्षम जीव पृथ्वी पर पनपे थे. लेकिन वे किसी तरह के सूक्ष्म जीव थे यह एक पहेली थी. पहले सूक्ष्मजीवों की बात करें तो वे एकल कोशिकीय जीव होते हैं जिनके चारों एक परत होती है. वे पोषक तत्वों को खाते हैं या अवशोषित करते हैं और उनके जैविक अणुओं में बदल कर उनसे ऊर्जा निकालते हैं.
सूक्ष्मजीवी इतने छोटे होते हैं कि उन्हें बिना माइक्रोस्कोप के देखा ही नहीं जा सकता है. बैक्टीरिया और आर्किया श्रेणी के एकल कोशिकीय जीवों में केंद्रक नहीं होता है जिनमें अनुवांशकीय पदार्थ हो, वहां एकल कोशिकीय यूकैरियोट्स में केंद्रक और अन्य परतदार संरचनाएं हो सकती हैं. लेकिन वायरस अजीब होते हैं उनमें प्रोटीन से लिपटे अनुवांशकीय पदार्थ होते है, लेकिन अनुकूल हालात में ही वे बहुगुणित हो पाते हैं यानि वे जीवितों की विशेषताओं के साथ होने के बाद भी तकनीकी तौर पर जीवित भी नहीं होते हैं.
सोर्स :-“न्यूज़ 18 हिंदी|”
