अक्टूबर 25 2023 ! चीन, पश्चिमी प्रशांत महासागर में एक विशाल दूरबीन का निर्माण कर रहा है. इसका काम ‘घोस्ट पार्टिकल्स’ (Ghost Particle) का पता लगाना है. इन्हें ‘भूत कण’ या ‘न्यूट्रिनो’ (Neutrinos) भी कहा जाता है. नैचर मैग्जीन में इस महीने की शुरुआत में प्रकाशित एक लेख में वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि चीन (China) की यह दूरबीन अपनी तरह की दुनिया की सबसे बड़ी दूरबीन होगी. साल 2030 तक इस दूरबीन के तैयार होने की उम्मीद है.
चीन ने अपनी इस दूरबीन को ‘ट्राइडेंट’ (Tropical Deep-sea Neutrino Telescope) नाम दिया है. Space.com की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन पश्चिमी प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह से 11,500 फीट (3,500 मीटर) नीचे इस दूरबीन को लगा रहा है. इस दूरबीन में 24,000 ऑप्टिकल सेंसर हैं, जिन्हें 1200 से ज्यादा स्ट्रिंग्स पर लगाया गया है.
रिपोर्ट के मुताबिक ट्राइडेंट का डिटेक्टर 2.5 मील (4 किलोमीटर) व्यास में फैला होगा. यह इतना ताकतवर होगा कि 1.7 घन मील (7.5 घन किलोमीटर) तक ‘घोस्ट पार्टिकल्स’ को स्कैन कर लेगा. चीनी मीडिया के मुताबिक साल 2026 में पायलट प्रोजेक्ट के तहत इस डिटेक्टर की टेस्टिंग शुरू हो जाएगी. हालांकि फुल डिटेक्टर साल 2030 तक ही शुरू हो पाएंगे.
वैज्ञानिकों के मुताबिक भूत कण या Neutrons एक तरीके के इलेक्ट्रॉन हैं. लेकिन इनका भार न के बराबर होता है और कोई चार्ज भी नहीं होता. घोस्ट पार्टिकल्स यानी भूत कण को ब्रह्मांड का सबसे मायावी कण कहते हैं. यह इतने बारीक होते हैं कि इन्हें देखना बहुत मुश्किल है. इसको एक उदाहरण से समझ सकते हैं. वैज्ञानिकों के मुताबिक हर सेकेंड हमारे शरीर से कम से कम 10 ट्रिलियन ‘भूत कण’ गुजरते हैं. इनकी गति प्रकाश की गति जितनी होती है.
सोर्स :-“न्यूज़ 18 हिंदी|”
