• June 3, 2026 7:42 pm

मशीन नाकाम होने के बाद मैनुअल ड्रिलिंग का सहारा, किस तरह से हो रही है ये ड्रिलिंग

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28  नवंबर 2023 ! ये मज़दूर बीते 17 दिनों से सिलक्यारा में यमुनोत्री राजमार्ग पर निर्माणाधीन सुरंग में हुए भूस्खलन के बाद फँसे हुए हैं.

उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने मीडिया से कहा, “52 मीटर तक ड्रिलिंग का काम पूरा हो चुका है और 57 मीटर पर ब्रेकथ्रू मिल सकता है. कल से मैन्युअल ड्रिलिंग जारी है.”

मैन्यूअल ड्रिलिंग के लिए दिल्ली से एक्सपर्ट बुलाए गए हैं. 12 लोगों की ये टीम रैट माइनिंग तकनीक पर काम करती है.

इस टीम का नेतृत्व कर रहे वक़ील हसन ने बीबीसी से कहा, ”800 एमएम डायमीटर के पाइप में दो लोग अंदर जाकर अपने हाथों से खोदकर मलबा बाहर भेजते हैं. दो लड़के अपने हाथों से मलबा हटाने का काम करते हैं, जिसके बाद उस मलबे को बाहर हाथ से बनाई गाड़ी से हटाया जाता है.”

सिलक्यारा सुरंग बनाने संस्था नेशनल हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर डिवेलपमेंट कॉर्पोरेशन (एनएचआईडीसीएल) के प्रबंध निदेशक महमूद अहमद ने पहले बताया था, ”सिलक्यारा की तरफ़ से सुरंग के भीतर मलबा भेदकर स्टील के पाइप से निकास सुरंग बनाने का जो काम चल रहा था, उसकी बाधाओं को दूर करके मैनुअल ड्रिलिंग का काम शुरू हो चुका है.”

उन्होंने इसके बारे में कहा, ”अभी तक ऑगर मशीन से ड्रिलिंग की जा रही थी, अब मैनुअल ड्रिलिंग से ही रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा किया जाएगा.”

उन्होंने सोमवार की देर शाम इस अभियान की जानकारी देते हुए बताया था, ”शुक्रवार रात मशीन का बड़ा हिस्सा सुरंग के मलबे में दबे लोहे के गार्डर में फंस गया था. इसके बाद काम को रोकना पड़ा था. अब इस हिस्से को काटकर अलग कर दिया गया है. सोमवार शाम 7.45 बजे तक मैनुअल ड्रिलिंग के ज़रिए 800 एमएम के पाइप को 0.9 मीटर तक अंदर धकेला गया है.”

उन्होंने कहा, ”ये दोनों लोग संकरी जगह और विषम परिस्थितियों में कार्य करने के अभ्यस्त होते हैं. यह काम रेट माइनिंग तकनीक से होगा. रैट माइनर्स प्लाज्मा और लेजर कटर से आगे राह बनाते चलेंगे और पीछे से ऑगर मशीन से 800 मिमी व्यास के पाइप को अंदर धकेला जाएगा.”

नीरज खैरवाल के मुताबिक, ”सुरंग के मुख्य द्वार यानी सिलक्यारा टनल में अभी जहाँ तक पाइप पहुँचा हुआ है, वहां से श्रमिकों की दूरी केवल 10 से 12 मीटर है.”

उन्होंने बताया, ”इस योजना के अंतर्गत रेट माइनर्स हाथों से औजारों का प्रयोग कर मलबा हटाते हुए सुरंग बनाने का काम करेंगे. जब वह एक से दो मीटर मिट्टी हटा लेंगे, फिर इसमें ऑगर मशीन को पाइप के भीतर डालने वाली मशीन से पीछे से दूसरे पाइप को अंदर घकेला जाएगा.”

सुंरग के अंदर किसी तरह के अवरोध मिलने की आशंका पर नीरज खैरवाल ने कहा, ”उम्मीद की जा रही है कि यह कार्य आसानी से होगा. अगर कहीं इसमें आगे लोहे की रॉड, सरियों का जाल या कोई रुकावट आती है, तो फिर रेट माइनर्स प्लाज्मा कटर या लेजर कटर से इन अवरोध को काट कर आगे का रास्ता बनाएंगे.”

उन्होंने बताया, ”उम्मीद है कि यह काम तीन या चार दिन में पूरा कर लिया जाएगा. अगर किसी कारणवश 800 मिमी व्यास के पाइप को धकेलने में बाधा आई तो 700 मिमी व्यास के पाइप को दाख़िल कराने का प्रयास किया जाएगा.”

नीरज खैरवाल ने आगे बताया,” सुरंग के मुख्य द्वार (सिलक्यारा की तरफ) से श्रमिकों को निकालने के लिए स्टील पाइप पुश करके लगभग 49 मीटर लंबी निकास सुरंग तैयार हो चुकी है. सात से 10 मीटर तक का काम बाक़ी है.”

दरअसल मज़दूरों को बचाने के लिए रविवार से ही वर्टिकल और हॉरिज़ॉन्टल ड्रिलिंग का काम किया जा रहा है. सुरंग के ऊपर वर्टिकल ड्रिलिंग कर रेस्क्यू टनल बनाने की जिस योजना को 21 नवंबर से होल्ड पर रखा गया था, उस पर भी काम शुरू हो चुका है.

उस पर सतलज जल विद्युत निगम लिमिटेड (एसजेवीएनएल) ने काम शुरू कर दिया है.

एनएचआईडीसीएल के प्रबंध निदेशक महमूद अहमद ने बताया, ”सोमवार शाम 7.30 बजे तक 36 मीटर ड्रिलिंग की जा चुकी है. श्रमिकों तक पहुँचने के लिए कुल 86 से 88 मीटर ड्रिलिंग की जानी है, इसमें क़रीब चार दिन लगने की संभावना है.”

ऑगर मशीन के सुरंग में फँसने के बाद से बचाव अभियान की दिशा को लेकर शनिवार शाम तक संशय की स्थिति थी, ऐसे में रविवार सुबह अधिकारियों ने विशेषज्ञों के साथ बैठक कर वर्टिकल ड्रिलिंग का फ़ैसला लिया था.

महमूद अहमद ने बताया, ”आमतौर पर इतनी ड्रिलिंग में 60 से 70 घंटे लगते हैं, लेकिन एक ही पाइप ड्रिलर से पूरी ड्रिलिंग संभव नहीं है. अन्य पाइल ड्रिलर का भी इस्तेमाल जाएगा.”

  सोर्स :-“BBC  न्यूज़ हिंदी”                                  


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