किसी भी इंसान में अच्छे-बुरे दोनों इमोशंस होते है खराब सोहबत, टॉक्सिक पार्टनर से नेगेटिविटी ट्रिगर होती हैं और तो और कई बार बदलते मौसम का असर भी हमारे मूड पर पड़ता है जिसे सीज़नल डिफेक्टिव डिसऑर्डर कहते हैं इससे ना केवल बेवजह मायूसी होती है सिरदर्द, बॉडी पेन, थकान, आलस भी परेशान करते हैं।
दुनिया में क्या कोई ऐसा शख्स है जो कभी उदास नहीं होता चिंता-तनाव,नेगेटिव इमोशन से जिसका दूर दूर तक कोई नाता नहीं है। आजकल की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में लोग हंसना तक भूल गए हैं और स्ट्रेस तो ज़िंदगी का हिस्सा बन चुका है। देखिए नामुमकिन जैसा कुछ नहीं होता और इसका जीता जागता उदाहरण है फ्रांस में जन्में और अब तिब्बती भिक्षु बन चुके मैथ्यू रिचर्ड उनके दिमाग पर तो विस्कॉन्सिन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने 12 साल तक रिसर्च की है।सेंसर से उनके ब्रेन को जोड़ा गया और फिर रिसर्चर्स ने माना कि मैथ्यू के दिमाग में नेगेटिविटी के लिए कोई जगह है ही नहीं। क्योंकि किसी भी इंसान में अच्छे-बुरे दोनों इमोशंस होते है खराब सोहबत, टॉक्सिक पार्टनर से नेगेटिविटी ट्रिगर होती हैं और तो और कई बार बदलते मौसम का असर भी हमारे मूड पर पड़ता है जिसे सीज़नल डिफेक्टिव डिसऑर्डर कहते हैं इससे ना केवल बेवजह मायूसी होती है सिरदर्द, बॉडी पेन, थकान, आलस भी परेशान करते हैं।

