• June 5, 2026 10:27 am

देश में धंधा करना होगा आसान, बिजनेसमैन को मिलेगी राहत, सरकार लेकर आई ये नया कानून

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29 जुलाई 2023 ! भारत में बिजनेस करना आसान हो, मोदी सरकार सत्ता में आने के बाद से लगातार इसी कोशिश में लगी है. इसलिए सरकार ने लगातार ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बेहतर करने पर ध्यान दिया है. अब इसी दिशा में सरकार एक नया विधेयक लेकर आई है जिसे लोकसभा ने मंजूर भी कर दिया है. जल्द ही इसके कानून बनने के बाद देश में बिजनेस करने का तौर-तरीका काफी बदल जाएगा.

दरअसल सरकार ने लोकसभा में ‘जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) विधेयक 2023 पास कराया है. ये 19 मंत्रालयों के 42 कानूनों से जुड़े 183 प्रावधान का संशोधन करता है. इससे देश में व्यापारी और कारोबारियों पर कंप्लायंस का बोझ कम होगा. साथ कई और लाभ भी होंगे…

मोदी सरकार का मूल मंत्र है कि देश में बिजनेस करना ‘क्राइम’ नहीं होना चाहिए. नया विधेयक इसी बात को आगे बढ़ाता है. भारत में कई कानूनी प्रावधान ऐसे हैं जिसमें छोटी-मोटी गलती के लिए भी जेल की सजा का प्रावधान है. विशेषज्ञों का कहना है कि कानून के उल्लंघन के लिए सजा मिलनी चाहिए, लेकिन ये क्रिमिनल ऑफेंस ना होने के बजाय सिविल ऑफेंस होना चाहिए. वहीं बिजनेस को रेग्युलेट करने के नियम कड़े होने चाहिए.

सरकार ने एक कार्यकारी समूह बनाया है, जिसे ऐसे कानूनी प्रावधानों की पहचान करने के लिए कहा गया है जो बिजनेस करने से जुड़ी गतिविधियों को क्रिमिनल ऑफेंस बनाते हैं. अब ये समूह देश में और ऐसे कानूनी प्रावधान की पड़ताल करेगा और उनके डी-क्रिमिलाइजेशन की सिफारिश करेगा.

देश में रिटेल सेक्टर में बिजनेस करने से जुड़े कानूनों में सबसे ज्यादा क्रिमिनल प्रोविजन हैं. टीमलीज रेगटेक की एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक रिटेल सेक्टर में काम करने वालों के कानून का पालन नहीं करने की स्थिति में जेल जाने के ज्यादा चांसेस हैं. अगर कोई कंपनी कई सारे रिटेल एस्टैबलिशमेंट के साथ एक रिटेल चेन चलाती है, जिसका ऑपरेशन 6 शहरों में है. ये दो राज्यों से अधिक में फैले हैं और कॉरपोरेट ऑफिस किसी एक राज्य में हैं, तो उसे एक साल में 3,182 कानूनी प्रावधानों का पालन करना पड़ता है.

टीमलीज की रिपोर्ट के मुताबिक इसमें से 1192 (37 प्रतिशत) प्रावधान का पालन नहीं करने पर जेल हो सकती है. इसमें से 43 प्रतिशत कानून राज्य सरकारों के हैं, बाकी केंद्र सरकार. सबसे ज्यादा कानूनी प्रावधान (लगभग 54 प्रतिशत) श्रम कानूनों से जुड़े हैं.

सोर्स :- ” TV9 भारतवर्ष    


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