15जुलाई 2022 21 साल के दो स्टूडेंट्स ने छोटे से कमरे में मशरूम उगाने का एक्सपेरिमेंट किया, वो भी बिना मिट्टी के। प्रयोग सफल रहा तो दोनों ने खेती शुरू कर दी और अब महज एक साल में लाखों रुपए की कमाई कर रहे हैं।
यही नहीं, दोनों किसानों काे ट्रेनिंग भी देते हैं। मशरूम के बढ़िया क्वालिटी के बीज तैयार करने के लिए अपना लैब भी तैयार किया है। उनके मशरूम की सप्लाई कई अन्य राज्यों में भी होती है।
कोटा के बोरखेड़ा और रंग तालाब के रहने वाले यशराज साहू और राहुल मीणा दोस्त हैं। यशराज ने कॉलेज में एडमिशन से पहले ही 2017 में 10 बैग के साथ मशरूम उगाने का ट्रायल किया था। 2018 में कोटा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी में एडमिशन लिया तो वहां राहुल से मुलाकात हुई। इसके बाद दोनों ने मशरूम की खेती के प्रोजेक्ट पर काम करना शुरू किया।
दोनों ने बीएससी एग्रीकल्चर करने के साथ ही नौकरी के बजाय मशरूम की खेती करने की प्लानिंग और ट्रेनिंग के बाद घर में खाली जगह पर छोटे स्तर पर कामकाज शुरू कर दिया।
अब दोनों मिलकर मशरूम के बीज तैयार करने की लैबोरेटरी खोल चुके हैं। 2022 में ही दोनों की डिग्री पूरी हुई थी। अब वे इसे अपना प्रोफेशन बना चुके हैं और एक बार की क्रॉप में लाखों रुपए कमा रहे हैं।
किसानों को भी दे रहे ट्रेनिंग
यशराज और राहुल ने बताया कि वे खुद खेती के साथ-साथ किसानों को भी ट्रेनिंग दे रहे हैं। अब तक 30 से 35 किसानों को मशरूम की खेती की तकनीक सिखा चुके हैं। ट्रेनिंग लेने वालों में तो कई लोग ऐसे भी हैं, जो आईटी सेक्टर की नौकरी छोड़कर मशरूम की खेती करना चाह रहे हैं।
दोनों ने बीज तैयार करने के लिए लैब भी बनाई है ताकि मशरूम के बीज बाहर से न लाना पड़े और उनकी क्वालिटी भी बेहतर रहे। वे किसानों को स्ट्रक्चर तैयार करने से लेकर फसल तक सहायता भी उपलब्ध कराते हैं। वे किसानों से खुद माल भी खरीदते हैं।
हवा में होती है मशरूम की खेती
यशराज साहू और राहुल ने बताया कि मशरूम की खेती हवा में होती है। खास बात यह है कि इसके लिए खेत या मिट्टी की भी जरूरत नहीं है। कोई भी व्यक्ति अपने घर में ही मशरूम उगा सकता है। मकान के खाली पड़े कमरे, झोपड़ी या खाली स्थान पर आसानी से इसकी खेती की जा सकती है।
मशरूम की खेती के लिए गेहूं के भूसे और बीज की जरूरत पड़ती है। इसकी खेती साल भर की जा सकती है। खास बात यह है कि इसके लिए जो स्ट्रक्चर तैयार होता है उसमें रस्सी लटका दी जाती है और उन पर बैग तैयार करके लटकाए जाते हैं। जितनी लागत होती है, उससे दोगुनी आय।
फूल के साथ बिकता है पाउडर
दोनों दोस्त मशरूम के फूल, पाउडर और बीज तीनों का प्रोडक्शन कर रहे हैं। 500 बैग से एक हजार किलो फूल का प्रोडक्शन होता है। लेकिन, जब ड्राई पाउडर बनाते हैं तो 10 किलो फूल से 1 किलो पाउडर बनता है। दो महीने में आने वाली एक फसल का पाउडर बनाने से एक लाख रुपए तक कमा सकते हैं।
source “दैनिक भास्कर”
