नवंबर 2 2023 ! लेकिन तृणमूल कांग्रेस और ख़ासकर ममता बनर्जी के विरोध के कारण टाटा को आख़िरकार यहाँ से इस परियोजना को समेटना पड़ा था.
अब मध्यस्थता न्यायाधिकरण ने सिंगूर में नैनो कार परियोजना ठप होने के कारण हुए नुक़सान के लिए टाटा मोटर्स को मुआवज़े के तौर पर क़रीब 766 करोड़ रुपये देने का निर्देश दिया है.
हालांकि, राज्य सरकार ने कहा है कि उसके पास तमाम क़ानूनी विकल्प मौजूद हैं.
सिंगूर और नंदीग्राम में ज़मीन अधिग्रहण विरोधी आंदोलनों ने ही ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के सत्ता में पहुंचने का रास्ता साफ़ किया था. सिंगूर आंदोलन राज्य के सरकारी स्कूलों में आठवीं क्लास की इतिहास की किताब का हिस्सा बन चुका है.
उस आंदोलन के क़रीब 15 साल बाद औद्योगीकरण के मुद्दे पर ममता बनर्जी के रुख़ में भले 360 डिग्री का बदलाव आ चुका है, मगर सिंगूर का भूत उनकी सरकार का पीछा नहीं छोड़ रहा है.
दरअसल, वह लंबे अरसे बाद राज्य में पहला बड़ा निवेश था. उसके बाद इस परियोजना के लिए क़रीब एक हज़ार एकड़ ज़मीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हुई. लेकिन इसके लिए हुगली ज़िला प्रशासन की ओर से बुलाई गई तमाम बैठकों का तृणमूल कांग्रेस ने बहिष्कार किया था.
30 नवंबर 2006 को पुलिस ने जब ममता बनर्जी को सिंगूर जाने से रोक दिया तो तृणमूल कांग्रेस के विधायकों ने विधानसभा में बड़े पैमाने पर हंगामा और तोड़-फोड़ की थी.
विपक्ष की नेता के रूप में ममता बनर्जी ने तीन दिसंबर 2006 से कोलकाता में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ आमरण अनशन शुरू किया.
मौजूदा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह समेत कई नेताओं ने 26 दिन के उस अनशन के दौरान ममता से मुलाक़ात कर एकजुटता जताई थी. बुद्धदेव भट्टाचार्य ने ममता बनर्जी को दो-दो बार बातचीत का न्योता दिया था, लेकिन वे नहीं गईं.
24 अगस्त 2008 को ममता बनर्जी ने सिंगूर में परियोजना के लिए अधिगृहित 1,000 एकड़ में 400 एकड़ ज़मीन वापसी की मांग करते हुए दुर्गापुर एक्सप्रेस हाईवे पर विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया.
आख़िर तीन अक्टूबर 2008 को राज्य के सबसे बड़े त्योहार दुर्गा पूजा से ठीक दो दिन पहले रतन टाटा ने कोलकाता में अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में लखटकिया कार परियोजना को सिंगूर से बाहर ले जाने का एलान किया.
उन्होंने इसके लिए ममता बनर्जी के नेतृत्व में जारी तृणमूल कांग्रेस के आंदोलन को ज़िम्मेदार ठहराया था. इसके बाद नैनो फैक्ट्री को गुजरात के साणंद में शिफ्ट कर दिया गया.
लंबे समय तक चली अदालती कार्यवाही के बाद 31 अगस्त, 2016 को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर वह ज़मीन किसानों को लौटा दी गई. वहां थोड़ी ज़मीन पर कुछ समय बाद खेती शुरू हुई.
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हाल में पत्रकारों से कहा था कि सिंगूर में जिस 997 एकड़ ज़मीन का अधिग्रहण किया गया था, उसमें से 800 एकड़ खेती के लायक है. उसमें से 434 एकड़ पर 2016 से ही खेती हो रही है.
दिलचस्प ये भी है कि किसानों की ज़मीन पर लगने वाली टाटा परियोजना का विरोध करने वाली ममता बनर्जी ने सत्ता में लौटने के बाद एक बार फिर टाटा समूह को राज्य में निवेश के लिए आमंत्रित किया.
ममता बनर्जी सरकार हर साल बड़े पैमाने पर बंगाल वैश्विक व्यापार सम्मेलन आयोजित करती रही हैं. उनमें तमाम बड़े औद्योगिक घरानों को न्योता भेजा जाता रहा है.
निवेश आकर्षित करने के लिए उन्होंने गौतम अदानी से भी मुलाकात की है और उनके साथ निवेश के समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. यही नहीं, निवेश आकर्षित करने के लिए ममता कई बार विदेश दौरे भी कर चुकी हैं. उन्होंने हाल में ही दुबई और स्पेन का भी दस दिनों का दौरा किया था.
सोर्स :-“BBC न्यूज़ हिंदी”
