15 नवम्बर2021 | हरियाणा स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (एचएसएससी) ने पहली बार भर्ती परीक्षा में आवेदकों से परीक्षा केंद्र पर आने के ‘हां’ और ‘ना’ चुनने का विकल्प रखा है। एचएसएससी चेयरमैन भोपाल सिंह खदरी के अनुसार, यदि 70 फीसदी से ज्यादा अभ्यर्थियों ने ‘हां’ विकल्प चुना तो सभी के प्रवेश पत्र जारी किए जाएंगे।
वहीं, ‘हां’ विकल्प 70 फीसदी से कम चुने जाने पर ‘ना’ विकल्प चुनने वालों की फीस वापस की जाएगी। इसी के हिसाब से केंद्रों पर अभ्यर्थियों के बैठने की व्यवस्था की जाएगी। कमीशन का मानना है कि जब ‘ना’ विकल्प चुनने वाले अभ्यर्थी परीक्षा ही नहीं देंगे तो फीस भी नहीं ली जाएगी। कमीशन ने अभ्यर्थियों को 15 नवंबर तक विकल्प चुनने का समय दिया है। डिमांड आने पर विकल्प चुनने की समयसीमा को और बढ़ाया जा सकता है।
उल्लेखनीय है कि एचएसएससी ने पूर्व में हुई भर्तियों के दौरान परीक्षा केंद्रों पर आवेदकों की संख्या के हिसाब से बैठने की व्यवस्था कराई थी। साथ ही, प्रवेश पत्र, सुरक्षा, इंवीजिलेटर्स आदि की भी व्यवस्था की गई थी। इस पर काफी खर्च होता है। उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले ही एचएसएससी ने भर्ती परीक्षाओं के खर्चों में कटौती की बात कही थी, इसके तहत ही यह कदम उठाया गया है।
10.03 लाख आवेदनों से सरकार के खजाने में आए 5 करोड़ रुपए
कमीशन की ओर से 26 से 28 नवंबर तक ग्राम सचिव, कैनाल व रेवन्यू पटवारी के 2385 पदों के लिए लिखित परीक्षा आयोजित करानी है। ग्राम सचिव व पटवारी पदों के लिए 2019 और 2021 में कुल 10 लाख 3 हजार ने फॉर्म भरे गए। इन पदों पर सामान्य वर्ग के लिए 100 रुपए, एससी-बीसी के लिए 25 और एससी-बीसी महिला के 13 रुपए फीस रखी गई। औसत 50 रुपए भी प्रति अभ्यर्थी की फीस माने तो सरकार को इससे 5 करोड़ रुपए मिले।
कांस्टेबल भर्ती में एक अभ्यर्थी पर करीब 500 रुपए खर्च हुए
पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा के लिए 8.39 लाख फॉर्म भरे गए थे। इनमें से सिर्फ 3.50 लाख ने ही परीक्षा दी थी। कमीशन के अनुसार, एक अभ्यर्थी पर औसतन 500 रुपए खर्च हुए। यानी लगभग 42 करोड़ रुपए खर्च हुए। यदि अभ्यर्थियों की संख्या का पहले ही पता होता तो 18 करोड़ रुपए भी खर्च नहीं होते।
Source :-“दैनिक भास्कर”
