रसोई के हुनर को बनाया रोजगार का जरिया
हिमाचल प्रदेश

रसोई के हुनर को बनाया रोजगार का जरिया

शिमला : अपने परिवार के लिए तो हर कोई बेहतर करने की सोचता है, लेकिन जो दूसरों की राह को भी आसान करे ऐसे लोग बिरले ही मिलते हैं। ऐसा ही एक दंपती राजधानी शिमला के लोअर बाजार में रहता है। हम यहां बात कर रहे हैं गिरीश मिनोचा व पत्नी सोनिया मिनोचा की। गिरीश मिनोचा ने मिची इंडस्ट्री स्थापित कर जिला शिमला के बेरोजगारों की राह आसान की है।

यह दंपती अपने लिए ही नहीं जी रहा, बल्कि बेरोजगारों के एक बड़े समूह को रोजी-रोटी से जोड़ रहा है। उनकी कामयाबी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रही है। इन्होंने दादी-नानी के नुस्खे की रसोई के हुनर को रोजगार का जरिया बनाया। इन्होंने पहले घर पर ही सिरका बनाना शुरू किया। सिरका अब ब्रांड बन गया है। पहले गिरीश मिनोचा ने अपने जेब खर्च से शुरू किए गए कारोबार में बेरोजगार महिलाओं, युवकों को जोड़ा। पुराने जमाने में दादी-नानी के घरेलू नुस्खों और पुरानी दवाओं के रूप में पहचाने जाने वाले हिमालयी उत्पादों और जड़ी-बूटियों को गिरीश मिनोचा आम लोगों को परोसने में कामयाब हो रहे हैं।

मिनोचा ने हड्डियों का दर्द मिटाने के लिए गुट्टी के नाम से पहाड़ों में इस्तेमाल की जाने वाली खुबानी की गुठली का तेल भी बाजार में पहुंचा दिया है। इसकी तासीर गर्म मानी जाती है। पहाड़ों के बेशकीमती उत्पाद को लोगों तक पहुंचाने और ब्रांड नाम से बेचने में मिनोचा को काफी मेहनत करनी पड़ी। 1993 में 10 हजार से हुई थी मिची इंडस्ट्री की शुरुआत

मिची इंडस्ट्री की शुरुआत 1993 में महज 10 हजार रुपये से की गई। करीब तीन दशक के प्रयास के बाद आज मिची फूड प्रोडक्ट्स का कारोबार 15 करोड़ रुपये तक हो गया है। प्रत्यक्ष रूप से 160 लोगों को रोजगार मिला है। जबकि करीब पांच हजार लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिल रहा है। मिची का एप्पल साइडर ने बनाई पहचान

मिची इंडस्ट्री के एप्पल साइडर ने देश-विदेश में अलग पहचान बनाई है। अन्य राज्यों में इसकी काफी मांग है। भूटान, नेपाल जैसे देशों में भी मिची की मांग है। अन्य राज्यों से आने वाले पर्यटक मिची एप्पल साइडर किक को गिफ्ट के रूप में एक-दूसरे को देते हैं। जबकि स्थानीय स्तर पर मिची के इस उत्पाद की पहचान मुच्छड़ के नाम से जानी जाती है। मुच्छड़ इसलिए कि साइडर की बोतल पर बने लोगों में बड़ी-बड़ी मूच्छें लगी हैं। दादा की सीख ने दी गुणवत्ता सुधार की प्रेरणा

मिनोचा बताते हैं कि उनकी तरक्की न सिर्फ हिमाचल में होने वाले फूलों और फलों की प्रोसेसिग से हुई है बल्कि दादा जी की कही एक बात को वह हर वक्त याद रखते हैं। उनके दादा जी ने यह बात कही थी। काका खान-पीन दा की शुरू कित्ता है, चीज ओही बनाई जो अपणे बच्चयां नूं दे सकदा। उन्होंने इस बात को गांठ बांध लिया और इसे मिची के उत्पादों की गुणवत्ता की कसौटी बना दिया। इस बात पर खरा उतरने की चुनौती हमेशा उनके जहन में रहती है। गिरीश मिनोचा की पत्नी सोनिया मिनोचा भी इस कारोबार में पूरा साथ दे रही हैं। उत्पादन से लेकर गुणवत्ता सुधार की सभी व्यवस्था सोनिया मिनोचा ही देखती हैं। यह उत्पाद बनाते हैं

मिची फूड प्रोडक्ट्स के पास फ्रूट जूस, ड्रिक, स्क्वैश, क्रशेज से लेकर जैम तक विभिन्न प्रकार के उत्पाद हैं। यह कंपनी हिमाचल की फ्रूट वाइन इंडस्ट्री में पायनियर मानी जाती है। यह प्रीमियम क्वालिटी की फ्रूट वाइन भी बनाती है। ताजा और चुनिदा फलों से निर्मित वाइन को वंडर वाइन ब्रांड नाम से जाना जाता है।

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