01 फ़रवरी 2023 | आपने इंसानों को शिकार बनाने वाले जानवरों के बारे में तो सुना होगा, लेकिन क्या आपको नरभक्षी पौधों के बारे में जानकारी है. करीब 250 साल पहले कीट-पतंगों और जानवरों को खाने वाले पौधों के बारे में लोगों को जानकारी मिल गई थी. नरभक्षी पौधों को सबसे पहले महान वैज्ञानिक चार्ल्स डार्विन ने खोजा और लोगों को इनके बारे में बताया. इससे पहले माना जाता था कि पौधे बिना बाहरी कारणों के जब हिल ही नहीं सकते हैं तो पेड़-पौधों के नरभक्षी होने का सवाल ही नहीं उठता है. डार्विन को यह साबित करने में 16 साल लग गए कि पौधे भी मांसाहारी हो सकते हैं.
19वीं सदी के आखिर में ऐसे कई पेड़ों का जिक्र आम हो गया था, जो कीट-पतंगों या जानवरों को ही नहीं इंसान को भी अपना शिकार बनाकर खा जाते हैं. काफी लोगों के नरभक्षी पौधों को लगाने और फिर उनका शिकार होने की जानकारियां भी सामने आने लगीं. कुछ पौधे कीड़े-मकोड़ों को जकड़कर उनसे प्रोटीन निचोड़कर वापस फेंक देते हैं. इन मांसाहारी पौधों में कीट-पतंगों को अपनी ओर आकर्षित करने की विशेष क्षमता होती है. कीड़े-मकोड़े इनकी इसी खूबी के चक्कर में शिकार बन जाते हैं. डार्विन ने साबित किया कि कुछ पौधों की पत्तियों की संरचना ऐसी होती है, जिससे वे कीड़ों को पकड़ते हैं और उन्हें पचाकर अपशिष्ट को उगल देते हैं.
कैसे पनप पाए नरभक्षी पेड़-पौधे?
डार्विन ने 1875 में कीट-पतंगों को खाने वाले पौधों के बारे में लिखा. इसमें उन्होंने इन पौधों के बारे में विस्तार से बताया. इसके बाद उन्होंने 1880 में दूसरी किताब ‘मोशन फोर्स इन प्लांट्स’ लिखी. इसके बाद लोगों को जीव खाने वाले पौधों के बारे में सोच बदलनी पड़ी. इससे पहले तक लोग जानवरों को मारकर खाने वाले पौधों के बारे में सिर्फ किस्से-कहानियों के बारे में ही सुनते थे. डार्विन ने पहली बार लोगों को वैज्ञानिक तरीके से समझाया कि ऐसे पौधे असल में होते हैं. अब ऐसे पौधों के बारे में वैज्ञानिक ज्यादा से ज्यादा जानकारी जुटाने के लिए लगातार काम कर रहे हैं. वैज्ञानिक जानने की कोशिश कर रहे हैं कि फल, फूल, पत्तियां देने वाले पौधों के बीच नरभक्षी पौधे कैसे पनपे?
कैसे कीटों को पचा लेते हैं ये पौधे?
चार्ल्स डार्विन की नरभक्षी पौधों को लेकर की गई खोजों के प्रकाशित होने के बाद से कीट शास्त्री, वनस्पति शास्त्री, परिस्थितिकी विज्ञानियों ने इनके बारे में जानकारी हासिल करना शुरू कर दिया. पहले ये जानने की कोशिश शुरू हुई कि उड़ने वाले कीट-पतंगों को दबोचकर अपना भोजन बनाने वाले पौधों में खाने, पचाने और अपशिष्ट बाहर निकालने का तंत्र कैसे तैयार कर लिया. बाद में पता लगाने की कोशिश की गई कि मांसभक्षी पौधों की जीवन प्रक्रिया क्या है. कीट-पतंगे और जानवर नरभक्षी पौधों के जाल में कैसे फंस जाते हैं? फिर ये पौधे उनको पचा कैसे लेते हैं.
मांसाहार पर निर्भर नहीं ये पौधे
वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को डीएनए सीक्वेंसिंग की मदद से ये पता करने में काफी मदद मिल रही है कि नरभक्षी या मांसाहारी पौधे कैसे पनपे. जींस की मदद से ये पता लगाने की कोशिश जारी है कि तमाम पौधों के बीच मांसाहारी पेड़-पौधों की शुरुआत कैसे हुई. वैज्ञानिकों के मुताबिक, अभी तक ऐसा कोई सबूत नहीं मिला, जिससे ये कहा जा सके कि मांसाहारी पौधों को ये गुण जानवरों से मिला है. हालांकि, अभी तक खोजों से ये पक्का हो चुका है कि मांस खाने और पचाने वाले पौधों का विकास फूल वाले पौधों से हुआ है. फूलों वाले पौधों में धीरे-धीरे मांस खाने और पचाने की क्षमता विकसित होती चली गई. हालांकि ऐसे पौधे अपने भोजन के लिए पूरी तरह से मांसाहार पर निर्भर नहीं होते हैं. ये फोटो-सिंथेसिस के जरिये भी अपना भोजन बना लेते हैं.
