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प्रयोगशाला में खुले पृथ्वी पर जीवन के आने के नए रहस्य

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03 मार्च 2023 | प्रयोगशाला में ही पुरातन पृथ्वी के हालात का सिम्यूलेशन कर वैज्ञानिकों ने पाया है कि बिना किसी खास तरह के अमीनो एसिड के पुरातन प्रोटीन उस तरह के जीवन में विकसित नहीं हो पाते जिसे आज हम जानते हैं. अमीनो एसिड पुरातन सूक्ष्मजीवों के जेनेटिक कोड कैसे आकार देते हैं. नए अध्ययन ने पता लगाया है कि जीवन के उत्पत्ति केलिए जिम्मेदार केवल खास तरह के अमीनो एसिड का निर्माण ही जिम्मेदार नहीं था. उन्होंने प्रयोगशाला में सिम्यूलेशन के जरिए उन हालात को पैदा किया जिससे शुरुआती जीवन का प्रोटीन बन सका. इसकी विस्तृत जानकारी देते हुए अध्ययन के नतीजों ने पृथ्वी पर जीवन के उत्पत्ति पर नई रोशनी डाली है.

साझा पूर्वज एकतरह के अमीनो एसिड
अमेरिका की जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी और चेक रिपब्लिक की चार्ल्स यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों की टीम का यह अध्ययन जर्नल ऑफ अमेरिकन कैमिकल सोसाइटी में प्रकाशित हुआ है. जॉन हॉपकिन्स में कैमिस्ट और इस अध्ययन के सहलेखक स्टीफन फ्राइड ने कहा, “आप इंसान से लेकर आर्काइया तक हर जीव में एक ही तरह के अमीनो एसिड देखते हैं. ऐसा इसलिए हैं क्योंकि पृथ्वी पर सभी का आपस में साझा संबंध है क्योंकि सभी जीवों का एक साझा पूर्वज है.“

घटनाओं की व्याख्या
शोधकर्ता उन घटनाओं की व्याख्या करना चाहते थे जिनसे पता चल सके कि उस पूर्वज को जो अमीनों एसिड मिले वे ही क्यों मिले. वैज्ञानिकों ने प्रयोगशाला की स्थितियों में अमीनो एसिड के वैकल्पिक समूह उपयोग कर 4 अरब साल पुराने आद्य प्रोटीन संश्लेषण की नकल कर बनाया जो हमारे ग्रह पर जीवन शुरू होने से पहले बहुतायत में थे.

प्रोटीन फोल्डिंग की जैवरासायिनिकता
शोधकर्ताओं ने पाया कि पुरातन जैविक यौगिक पदार्थों ने अमीनों एसिड को एक करने का काम किया जो प्रोटीन फोल्डिंग प्रक्रिया की जैवरासायिनिकता के लिए सबसे अच्छे थे, उनसे पता चला कि पृथ्वी पर जीवन केवल कुछ अमीनो एसिड की वजह से ही नहीं पनपा था जो पुरातन माहौल में उपलब्ध थे, बल्कि खास तौर पर उनमें से कुछ प्रोटीन को विशेष कार्य करने लिए निश्चित आकार देने में कारगर तौर पर सहायक थे.

बहुत उपयोगी रही प्रोटीन फोल्डिंग
फायर्ड ने बताया कि प्रोटीन फोल्डिंग के जरिए शोधकर्ता मूल रूस से पृथ्वी पर जीवन से पहले के विकास की स्थितियां बनाने में सफल रहे. जीवविज्ञान की शुरुआत से पहले भी उद्भव प्रक्रिया हो सकती है और रसायनों के मामले में भी प्राकृतिक चयन की प्रक्रिया लागू हो सकती है जिससे उन्हीं रसायन का चयन हुआ जो डीएनए के पहले भी जीवन के लिए उपयोगी थे.

सैंकड़ों में से केवल बीस
आद्य पृथ्वी में सैंकड़ो अमीनो एसिड थे. लेकिन सभी जीव उनमें से केवल 20 का ही उपयोग करते हैं जिन्हें वैज्ञानिकों ने कैनोनिकल अमीनो एसिड नाम दिया है. पहले अरब साल की अवधि में पृथ्वी पर गैसों का मिश्रण था जिनमें अमोनिया, कार्बन डाइऑक्साइड जिनकी पराबैंगनी किरणों से प्रतिक्रियाएं हुईं जिनसे कुछ अमीनो एसिड बने और बाकी उल्कापिंडों से आए.

पहले क्या डीएनए या प्रोटीन
लेकिन फिर भी कई अमीनो एसिड का निर्माण कैसे हुआ यह पता नहीं चल सका है और इस पर खोज और शोध जारी है. फ्रायड ने बताया कि शोधकर्ता यह जानने की कोशिश भी कर रहे हैं कि हमारे कैनोनिकल अमीनो एसिड में क्या खास बात थी और क्या वे किसी विशेष कारण से चयनित हुए थे. लेकिन इसके लिए डीएनए आरएनए को प्रोटीन में बदलने की प्रक्रिया की जरूरत होगी जबकि डीएनए बनाने के लिए खुद प्रोटीन की जरूरत होती है. यह पहले अंडा आया या मुर्गी जैसा सवाल है.

सोर्स :-“न्यूज़ 18 हिंदी|”   


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