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‘एक बार फिर Archived…’ कौन हैं हर 6 महीने में ट्रांसफर पाने वाले IAS अशोक खेमका?

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10 जनवरी 2023 |  30 साल की सर्विस में 56 बार ट्रांसफर पाने वाले IAS अधिकारी अशोक खेमका ने ये दर्द बयां किया है. सरकार से 56वें तबादले की चिट्ठी मिलने के बाद IAS अशोक खेमका ने अपने ट्विटर हैंडल पर ये बातें लिखी हैं. उनके शब्द बहुत कुछ बयां करते हैं. अशोक खेमका देश के सबसे चर्चित नौकरशाहों में से एक हैं. उन्हें उनकी ईमानदारी और बेबाकी के लिए जाना जाता है. तीन दशक के करियर में 56वां ट्रांसफर पाने वाले अशोक खेमका कौन हैं? आइए उनके बारे में जानते हैं.

हरियाणा सरकार ने सोमवार को सीनियर IAS ऑफिसर अशोक खेमका का ट्रांसफर कर दिया. साइंस एंड टेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट के अतिरिक्त मुख्य सचिव खेमका को अब आर्काइव डिपार्टमेंट के अतिरिक्त मुख्य सचिव के रूप में नियुक्त किया गया है. राज्य सरकार के इस फेरबदल में हरियाणा सिविल सर्विस के चार अधिकारियों को भी तत्काल प्रभाव से ट्रांसफर किया गया है.

1991 बैच के IAS अधिकारी अशोक खेमका की लगभग 30 साल की सर्विस का औसत निकालने पर पता चलता है कि उनका लगभग हर छह महीने में ट्रांसफर हो जाता है. हालांकि, सरकार की तरफ से जारी किए गए बयान में इस बात की जानकारी भी नहीं दी गई है कि उनका ट्रांसफर किन वजहों से हुआ है.

…तो इस वजह से हुआ ट्रांसफर!

लेकिन सूत्रों की मानें तो आईएएस ऑफिसर खेमका ने मुख्य सचिव सर्वेश कौशल को एक चिट्ठी लिखी थी. इस चिट्ठी में उन्होंने लिखा था कि साइंस एंड टेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट के हायर एजुकेशन डिपार्टमेंट में विलय के बाद उनके पास पर्याप्त काम नहीं है. इसके बाद ही उनका ट्रांसफर हुआ था. अशोक खेमका का करियर विवादित रहा है. उन्हें बार-बार ट्रांसफर का भी सामना करना पड़ा है. आखिरी बार उनका ट्रांसफर अक्टूबर 2021 में हुआ था.

कौन हैं अशोक खेमका?

अशोक खेमका हरियाणा कैडर के 1991 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी हैं. उनकी पहचान एक ईमानदार ऑफिसर और सबसे ज्यादा ट्रांसफर होने वाले अधिकारी के तौर पर होती है. खेमका एक अन्य रिटायर्ड IAS ऑफिसर प्रदीप कासनी के बाद हरियाणा के दूसरे ऐसे नौकरशाह हैं, जिनका सबसे ज्यादा ट्रांसफर हुआ है. कासनी को अपने 34 साल के करियर में 71 बार ट्रांसफर का सामना करना पड़ा.

वह मूल रूप से कोलकाता के रहने वाले हैं. उनका जन्म मध्यवर्गीय परिवार में हुआ था. उन्होंने आईआईटी खड़गपुर से 1988 में बी.टेक की डिग्री हासिल की. इसके बाद टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च से कंप्यूटर साइंस में पीएचडी किया. उनके पास बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन एंड फाइनेंस में एमबीए की डिग्री भी है. इसके बाद ही उन्होंने UPSC एग्जाम दिया और उनका हरियाणा कैडर के लिए सेलेक्शन हुआ.

अशोक खेमका उस वक्त चर्चा में आए थे, जब उन्होंने 2012 में सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा से जुड़े गुरुग्राम के एक जमीन सौदे का इंतकाल (म्यूटेशन) रद्द कर दिया था. इंतकाल भूमि के एक टुकड़े का स्वामित्व स्थानांतरित करने की प्रक्रिया का हिस्सा है. उस दौरान हरियाणा और केंद्र दोनों ही जगह कांग्रेस की सरकार थी. उनकी पहचान व्हिसिल ब्लोअर के रूप में भी होती है.

सोर्स :- ” TV9 भारतवर्ष |”   

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