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सरकारी बैंकों का सबसे ज्यादा घटा, फिर भी कुल फंसे कर्ज में इनकी हिस्सेदारी करीब 80%

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09 अगस्त 2022 | महामारी से उबरने के बाद रूस-यूक्रेन संकट का असर, महंगाई और बढ़ती ब्याज दरों के बीच देश का बैंकिंग सिस्टम मजबूत हुआ है। अप्रैल-जून तिमाही में 31 लिस्टेड बैंकों का ग्रॉस NPA 1.85% घटकर 5.66% रह गया। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह 7.51% था। 2015 के बाद इतना कम NPA अनुपात कभी नहीं रहा। हालांकि इसमें लोन राइट-ऑफ की भी भूमिका रही है।

सरकारी बैंकों का ग्रॉस NPA रेश्यो सबसे ज्यादा 2.21% घटा है। बीती तिमाही इन का NPA रेश्यो 7.18% रह गया, जो एक साल पहले 9.39% था। इस दौरान प्राइवेट बैंकों के ग्रॉस NPA में 1.10% और स्मॉल फाइनेंस बैंकों के NPA में 2.07% कमी आई। इसके बावजूद देश के बैंकिंग सिस्टम के कुल NPA में सरकारी बैंकों की हिस्सेदारी 80% के आसपास रही, जो लगभग पिछले साल के बराबर ही है।

पांच प्रमुख कोड, ट्रिब्यूनल से NPA घटाने में मिली मदद
फॉर्च्यून की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय बैंकों को NPA रेश्यो घटाने में एक के बाद एक शुरू किए गए इन रेजोल्यूशन मैकेनिज्म की बड़ी भूमिका रही है।

ट्रिब्यूनल से NPA घटाने में मिली मदद
1. इन्सॉल्वेंसी एंड बैंक्रप्सी कोड
2. वन टाइम सेटलमेंट
3. डेट रिकवरी ट्रिब्यूनल
4. कॉरपोरेट डेट रिस्ट्रक्चरिंग
5. सरफेसी एक्ट

नए NPA में कमी आना सबसे बड़ा एचीवमेंट
बैंकिंग सिस्टम में NPA घटने के कई कारण हैं। बड़े पैमाने पर रिकवरी, लोन रिस्ट्रक्चरिंग और राइट-ऑफ इनमें शामिल हैं। स्लिपेज रेश्यो कम होना इसकी सबसे बड़ी वजह है। मतलब नए NPA के मामले तेजी से घटे हैं।-मदन सबनवीस, चीफ इकोनॉमिस्ट, बैंक ऑफ बड़ौदा

सोर्स :- “दैनिक भास्कर “  


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