26 अक्टूबर 2021 | छत्तीसगढ़ आदिवासी-बहुल राज्य है. इसलिए यहाँ अब तक की सभी सरकारें यह प्रयास करती रही हैं कि आदिवासी समाज सहित सभी लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के बेहतर से बेहतर अवसर उपलब्ध हों और छत्तीसगढ़ की संस्कृति आगे बढ़े, और अधिक समृद्ध हो। सरकारों की यह भी मंशा रही है कि आदिवासियों को ज्यादा से ज्यादा संख्या में वन अधिकार पट्टे मिले। आदिवासी क्षेत्रों के लिए मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना भी लागू की गई है .इसके तहत यदि ग्राम पंचायतें अपने क्षेत्र की सरकारी जमीन पर वृक्षारोपण कराती है और उनकी देखभाल करती है तो ग्राम पंचायतों को भी तीन वर्ष तक 10 हजार रूपए प्रति एकड़ के मान से प्रोत्साहन राशि मिलेगी। इस योजना का ग्राम पंचायतें अधिक से अधिक लाभ लेकर अपनी आय में वृद्धि कर सकती हैं। इस योजना में फलदार वृक्ष लगाने जाने चाहिए, जिससे आय में आय में और अधिक वृद्धि होगी।
समर्थन मूल्य पर खरीदी जाने वाली लघु वनोपजों की संख्या 7 से बढ़ाकर 52 कर दी गई है। तेन्दूपत्ता संग्रहण दर 2500 रूपए से बढ़ाकर 4000 रूपए प्रति मानक बोरा कर दिया गया है। पहली बार कोदो-कुटकी, रागी का समर्थन मूल्य घोषित किया गया है। इन फसलों को खरीफ की फसलों के साथ राजीव गांधी किसान न्याय योजना में शामिल किया गया है। आय बढ़ाने के लिए तेलघानी बोर्ड गठित किया गया है, इससे गांव-गांव में तेल पेराई के लिए मशीन लगाने के लिए सहायता दी जाएगी। जिससे तिलहन फसलों- सरसों, अलसी सहित टोरा, नीम, करंज का तेल निकाला जा सकेगा और लोगों को आय का एक नया जरिया मिलेगा। इसी तरह जाति प्रमाण पत्र की प्रक्रिया को भी सरल बनाते हुए यह बदलाव किया गया है कि यदि पिता के पास जाति प्रमाण पत्र हैं तो उनके बच्चों को भी जाति प्रमाण पत्र जारी किए जा रहे हैं। स्कूलों में कैम्प लगाकर बच्चों के जाति प्रमाण पत्र बनाए जा रहे हैं। यदि किसी के पास प्रमाण स्वरूप कोई दस्तावेज नहीं है तो ग्राम पंचायतों के प्रस्ताव के आधार पर भी जाति प्रमाण पत्र जारी किए जा रहे हैं।
संपादकीय
बी के झा
