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मिर्जापुर की बहू आतिशी के सिर सजेगा दिल्ली का ताज, इस गांव में है ससुराल

ByPrompt Times

Sep 18, 2024
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दिल्ली की गद्दी संभालने जा रही यूपी की बहू आतिशी का यूपी से भी कनेक्शन है

जब से आम आदमी पार्टी ने आतिशी को दिल्ली का मुख्यमंत्री बनाने का ऐलान किया है, तभी से मिर्जापुर के अनंतपुर गांव में खुशी की लहर है. आतिशी का ससुराल इसी गांव में है. गांववालों का कहना है कि उन्हें इस बात का गर्व है कि गांव की बहू दिल्ली का शासन चलाएगी.

 

दिल्ली में सियासी हलचल के बीच अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. इसके बाद आम आदमी पार्टी ने सीएम पद के लिए आतिशी को चुना है. आतिशी ने सरकार बनाने का दावा भी पेश कर दिया है. ऐसे में उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर के अनंतपुर गांव में खुशी की लहर है. दरअसल, आतिशी का ससुराल इसी गांव में है. आतिशी इस गांव की बहू हैं.

 

आतिशी का ससुराल मिर्जापुर जिले के मझवा विधानसभा क्षेत्र के अनंतपुर गांव में है. ICAR के पूर्व अध्यक्ष और बीएचयू के वाइस चांसलर प्रो पंजाब सिंह के इकलौते बेटे प्रवीण सिंह की आतिशी पत्नी हैं. वर्ष 2004 में प्रवीण सिंह और आतिशी की शादी हुई थी. आतिशी दिल्ली की तीसरी महिला मुख्यमंत्री बनने जा रही हैं.

कौन हैं आतिशी के पति?

आतिशी के पति पंजाबी राजपूत परिवार से ताल्लुक रखते हैं. उनके पति का नाम प्रवीण सिंह है. प्रवीण एक रिसर्चर हैं. वह सद्भावना इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक पॉलिसी जैसे संस्थानों के साथ जुड़ कर काम कर रहे हैं. प्रवीण सिंह दिल्ली आईआईटी से पढ़े हैं और फिर आईआईएम अहमदाबाद से भी पढ़ाई की है. उन्होंने 8 साल तक कॉरपोरेट सेक्टर में काम किया है. भारत और अमेरिका की कई कंसल्टेंसी फर्म्स में भी काम कर चुके हैं. इसके बाद सोशल सर्विस में उतर गए. कहा जाता है कि आतिशी के पति प्रवीण भी शुरू से आम आदमी पार्टी में जुड़े थे, लेकिन बाद में प्रवीण ने चुपचाप लो प्रोफाइल में काम करना पसंद किया.

 

कछवां के अनंतपुर गांव से क्या है कनेक्शन?

कछवां के अनंतपुर गांव के रहने वाले प्रो पंजाब सिंह आतिशी के ससुर हैं. बीएचयू के पूर्व कुलपति प्रो पंजाब सिंह ने सहायक अध्यापक के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की थी. कृषि शोध एवं शिक्षा विभाग के सचिव व भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक के पद को भी रह चुके हैं.

मिर्जापुर के बरकछा में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय का राजीव गांधी दक्षिण परिसर है. इसकी स्थापना का श्रेय प्रो पंजाब सिंह को ही जाता है. 30 मई 2005 को काशी हिदू विश्वविद्यालय के कुलपति पंजाब सिंह बरकछा पहुंचे थे.उन्होंने बीएचयू का दक्षिण परिसर बनाने का ऐलान किया था. इसके बाद वर्ष 2006 में भूमि पूजन किया. उसी समय इसका नाम राजीव गांधी दक्षिणी परिसर रख दिया. 2700 एकड़ में फैले परिसर में आज हजारों छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं.

 

SOURCE – (PROMPT TIMES)


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