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कालचक्र बदल रहा है… अयोध्या में पीएम मोदी ने यूं ही नहीं कह दिया, बहुत गहरे हैं इसके मायने

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23जनवरी 2024
Ram Mandir Pran Pratishtha:
 राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के बाद पीएम मोदी का संबोधन चर्चा में है. एक्सपर्ट्स का साफ कहना है कि पीएम के संबोधन के वैसे तो कई मायने हैं लेकिन उन्होंने संदेश दे दिया कि हिंदू धर्म ही वो भावना है जो इस देश का प्रतिनिधित्व है, इस देश का सार है और यही भावना इस देश को आगे ले जाएगी. इतना ही उन्होंने कालचक्र का जिक्र किया और उसका जिक्र अपने दक्षिण भारत के दौरे की बात करते हुए किया. उन्होंने देश के अगले एक हजार साल की रूपरेखा का प्रस्ताव भी रख दिया. क्या यही राम राज्य का संकेत है? क्या यही भारत को विश्व गुरु बनाने की तरफ उठाया गया कदम है, इसे समझा जाना चाहिए.

असल में एक्सपर्ट्स पीएम मोदी के संबोधन को अयोध्या के बाद अब मथुरा-काशी की तरफ इशारा मानते हैं. मथुरा और काशी हिंदू धर्म के दो सबसे महत्वपूर्ण तीर्थस्थल हैं. उनका यह भी मानना है कि मोदी ने बिना किसी हार्ड शब्द के उपयोग किए हुए यह इशारा कर दिया है कि भारत अब हिंदुत्व की तरफ बढ़ रहा है. इसी हिंदुत्व के जरिए वे भारत को एक मजबूत और समृद्ध देश बनाना चाहते हैं. वे एक ऐसे भारत का निर्माण करना चाहते हैं जो सभी के लिए समृद्ध और समरस हो.

राम राज्य की स्थापना की तरफ मुड़ेगा कालचक्र!
उन्होंने कहा कि कल उन्होंने धनुषकोडी में रामसेतु के आरंभ बिंदु अरिचल मुनई का दौरा किया था. जब भगवान राम समुद्र पार करने निकले थे, तो वह एक ऐसा पल था जिसने काल चक्र को बदल दिया था. उन्होंने कहा कि उन्होंने उस भावमय पल को महसूस करने का प्रयास किया और वहां पुष्प अर्पित किए. उन्होंने कहा कि इस अनुभव ने उन्हें विश्वास दिलाया कि काल चक्र फिर से बदलेगा और शुभ दिशा में बढ़ेगा. इसका मतलब यह है कि तब राम रावण के ऊपर विजय प्राप्त कर लौटे थे और राम राज्य की स्थापना हुई थी.

भारतीय जनमानस की आस्था यही है!
पीएम मोदी अपने संबोधन में बार-बार भारतीय जनमानस की आस्था पर मुहर लगाते हुए दिख रहे थे. शायद यही कारण यही कि वे तीसरी बार पीएम बनने को लेकर आश्वस्त भी दिख रहे हैं. एक्सपर्ट्स का मानना है कि वैसे तो मोदी ने राम मंदिर आंदोलन में काफी सक्रिय भूमिका निभाई लेकिन वे नब्बे के दशक में ही यह समझ गए थे कि देश की बहुत संख्यक आबादी क्या चाहती है. वह विकास तो चाहती है लेकिन धर्म के मुद्दे पर उसे समझौते करना पसंद नहीं हैं. और इसकी बानगी 2014 से दिख रही है जो 2024 पहुंचते-पहुंचते साफ प्रतिबिंबित हो चुकी है.

विरोधियों को दे दी नसीहत, ‘पुनर्विचार कीजिए’
प्रधानमंत्री मोदी ने इस क्षण को आलौकिक और पवित्रतम बताते हुए कहा कि रामलला के इस मंदिर का निर्माण, भारतीय समाज के शांति, धैर्य, आपसी सद्भाव और समन्वय का भी प्रतीक है. हम देख रहे हैं, ये निर्माण किसी आग को नहीं, बल्कि ऊर्जा को जन्म दे रहा है. राम मंदिर पर विवाद खड़ा करने वाले विरोधियों को जवाब देते हुए मोदी ने कहा कि वे आज उन लोगों से आह्वान करेंगे कि महसूस कीजिए और अपनी सोच पर पुनर्विचार कीजिए, राम विवाद नहीं समाधान है, राम आग नहीं, राम ऊर्जा हैं. राम सिर्फ हमारे नहीं हैं, राम तो सबके हैं. राम वर्तमान ही नहीं, राम अनंतकाल हैं.

स्रोत -”जी न्यूज


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