अगस्त 30 2023 ग्रामीण विकास को गति देने के लिए छत्तीसगढ़ में चल रही गोधन न्याय योजना आज देश भर मे एक आदर्श के रूप में पहचान बना चुकी है. विशेष रूप से गाँव में आत्म निर्भरता हासिल अकरने के लिए यह योजना तेजी से लोकप्रिय हो चुकी है।
गौठानों मे संचालित आयमूलक गतिविधियों और लघु वनोपज के संग्रहण और प्रसंस्करण से लोगों की आमदनी बढ़ी है। गौठानों में अब तक 160 करोड़ रूपए की गोबर खरीदी हो चुकी है। गौठानों से जुड़ी समूह की महिला बहनों ने वर्मी कम्पोस्ट और कृषि से जुड़ी गतिविधियों का संचालन कर 80 करोड़ रूपए की आय हासिल की है। गौठानों में गो-मूत्र की खरीदी भी की जा रही है।
दो सालों के भीतर ही इस योजना के माध्यम से एकसाथ कई लक्ष्यों को साधने के साथ ही महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की गई है। गौठान और गोधन न्याय योजना के समन्वय से गांवों में रोजगार के नये अवसर सृजित हुए हैं। इस योजना में बन रहे वर्मी कम्पोस्ट के उपयोग से खेतों की मिट्टी मुलायम और उपजाऊ हो रही है। जिन खेतों में वर्मी कम्पोस्ट का उपयोग बेहतर ढंग से हुआ है, वहां अब अन्य प्रकार के रासायनिक उर्वरक की जरूरत नहीं पड़ रही है। राज्य के 26 लाख से अधिक किसानों को वर्मी कम्पोस्ट उपलब्ध कराने के लिए इसका बड़े पैमाने पर उत्पादन जरूरी है। राज्य के 5863 गौठान समितियों के बैंक खाते में आज की स्थिति में 79 करोड़ 60 लाख रूपए जमा है। लगभग 2500 गौठान समितियां के पास एक लाख से 10 लाख रूपए तक 46 गौठान समितियों के पास 10 लाख से लेकर 50 लाख रूपए तक स्वयं की पूंजी जमा है। यह उपलब्धि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की ग्राम सुराज और स्वावलंबी गांव के सपने को साकार करने की दिशा में एक मजबूत कदम है।
vibhash jha
