कई रोगों की दवा है यह चावल, शुगर न के बराबर- यूपी के इन जिलों में होती है इसकी पैदावार
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कई रोगों की दवा है यह चावल, शुगर न के बराबर- यूपी के इन जिलों में होती है इसकी पैदावार

गोरखपुरधान का कटोरा कहे जाने वाले इस क्षेत्र में कालाधान की फसल भी लहलहाने लगी है। 300 से 400 रुपये प्रति किग्रा बिकने वाले इसके चावल से किसानोंं के सपने पूरे होंगे। जिले के सहजनवा क्षेत्र में पहली बार पांच एकड़ में इसकी फसल बोई गई है तो महराजगंज जिले के निचलौल क्षेत्र में करीब 50 एकड़ में इसकी खेती शुरू हुई है। इसे मधुमेह रोगी भी खा सकेंगे। इसके खाने से मधुमेह का भी खतरा नहीं होगा। इसकी खेती से किसान अपनी आय दोगुनी कर सकेंगे।

गोरखपुर जिले के सहजनवा विकास खंड क्षेत्र में कृषि उत्पादक संगठन(एफपीओ) ब्रह्म कृषि बायो एनर्जी फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड ने कुछ किसानों के सहयोग से पांच एकड़ में इसकी खेती शुरू कराई है। इसके निदेशक महेंद्र प्रताप यादव का कहना है कि इसकी खेती किसान अपनी आय दोगुनी नहीं बल्कि तीन गुनी तक कर सकता है। सहजनवा क्षेत्र में इसकी खेती करने वाले श्रीप्रकाश शुक्ला, सत्य प्रकाश सिंह, विश्वनाथ यादव, दीनानाथ शुक्ला आदि शामिल हैं। यह धान मूलत: मणिपुर असोम की प्रजाति मानी जाती है। इससे एक एकड़ में 15-16 क्विंटल उत्पादन होता है। यह 140-145 दिनों में तैयार हो जाती है। इसकी खेती पूरी तरह आर्गेनिक होती है। इसलिए सेफ फूड के तौर पर भी इसका प्रयोग किया जा सकता है।

कालानमक चावल में खासियत

कृषि विज्ञान केंद्र बेलीपार के प्रभारी डॉ एसके तोमर का कहना है कि कालेधान से तैयार होने वाले चावल का रंग विशेष प्रकार के तत्व एथेसायनिन के कारण काला है। इसमें एंटीआक्सीडेंट ज्यादा है। विटामिन ई, फाइबर और प्रोटीन की बहुलता है। इसमें शुगर लेवल कम होता है। इससे मधमेह रोगी भी इसका सेवन कर सकते हैं। उच्च रक्तचाप, एलर्जी, गठिया की समस्या भी कम होती है। इस चावल से शरीर में प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता।

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