• June 4, 2026 11:42 pm

क्या तेल के बहाने हुआ खेल… भारत और वियतनाम का वो समझौता जिससे चीन को मिर्ची लग गई

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अक्टूबर 12 2023 ! भारत और वियतनाम ने नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में 12 अक्तूबर, साल 2011 को एक महत्वपूर्ण समझौते पर दस्तखत किए. यह समझौता दक्षिण चीन सागर में वियतनाम के स्पेशल इकोनॉमिक जोन में तेल की खोज करने को लेकर था. इसकी जानकारी आम होते ही चीन ने वियतनाम से सख्त आपत्ति जाहिर कर दी, क्योंकि दक्षिण चीन सागर के इस इलाके पर चीन की अपनी दावेदारी है.

यूं इस समझौते की नींव ओएनजीसी विदेश लिमिटेड ने साल 2006 में ही रख दी थी, जिसे बाद में 2011 में तत्कालीन पीएम डॉ. मनमोहन सिंह और वियतनाम के राष्ट्रपति ट्रोओंग तान सांग की मौजूदगी में समझौता हुआ. इस दिन प्रत्यर्पण संधि समेत कुछ और समझौते हुए थे.

ओएनजीसी विदेश लिमिटेड ने दक्षिण चीन सागर में वियतनाम के समुद्री क्षेत्र में अपनी खोज जारी रखी है. हालांकि अभी तक वहां कुछ खास सफलता हासिल नहीं हुई है लेकिन वियतनाम चाहता है कि भारत इस खोज को जारी रखे. क्योंकि उस इलाके में चीन से निपटने में उसकी यह पहल मददगार है.

यह एक बड़ी परियोजना है और चीन इसके महत्व से वाकिफ है, इसीलिए इस समझौते के लगातार विस्तार होने से चीन आज भी चिंतित है. इसी साल अगस्त में ओएनजीसी विदेश लिमिटेड को तीन साल का एक और विस्तार मिला है, इस तरह वियतनाम ने उसे आठवां विस्तार दिया है. चूंकि, चीन नहीं चाहता कि भारत इस क्षेत्र में दखल दे और वियतनाम चाहता है कि भारत हर हाल में इस इलाके में खोज जारी रखे.

अधिकारियों को उम्मीद है कि अब वे अपनी खोज परिणामों के अंतिम चरण में हैं, उम्मीद है कि यहां से बड़ी कामयाबी मिलेगी, जो भारत-वियतनाम, दोनों के लिए फायदे का सौदा साबित होगी.

सोर्स :- ” TV9 भारतवर्ष    


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