• June 5, 2026 12:26 am

पाकिस्तान में शांतिपूर्ण चुनाव संभव हैं या नहीं, आंकड़ों से जानिए

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अगस्त 16 2023 ! अस्पताल में उनके साथ उनकी माँ भी मौजूद थीं जो थोड़ी-थोड़ी देर में तेज़ आवाज़ के साथ बिलखने लगती थीं.

ऐसे में शाह मीना पहले अपनी मां को तसल्ली देतीं और जब उनकी मां चुप हो जातीं तो परेशान होकर वह दोबारा वार्ड में पड़े घायलों को पहचानने के काम में लग जातीं.

पाकिस्तान के क़बायली ज़िले बाजौड़ में कुछ घंटे पहले ही एक बड़ा आत्मघाती हमला हुआ था और शाह मीना परेशान थीं कि उनके दस साल के बेटे अबूज़र का कुछ पता नहीं चल रहा था.

इस घटना के एक हफ़्ते बाद बाजौड़ में अपने छोटे से घर के आंगन में बैठी शाह मीना ने कहा, “वह क़यामत का दिन था.”

उनका बेटा अबूज़र पास के एक मदरसे और वहीं से उस जगह पर गया था जहां जमीयत-उलेमा-ए-इस्लाम (फ़ज़लुर्रहमान) का समारोह चल रहा था.

अबूज़र के पिता बताते हैं कि वह सभा स्थल के बाहर चिप्स बेचने गया था.

“मेरी छह बेटियां हैं और केवल एक बेटा था. हम सबका लाडला. अल्लाह… वह दिन क़यामत था”, यह कहते हुए शाह मीना के हाथ कांप रहे थे.

वह बताती हैं कि धमाके की ख़बर मिलने के कुछ देर बाद वह अपनी मां के साथ अस्पताल गईं और इस दौरान उनके पति और भाई भी वहां पहुंच गए.

  सोर्स :-“BBC  न्यूज़ हिंदी”                                  


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