अफगानिस्तान के राष्ट्रपति डॉ. अशरफ गनी ने टेलीफोन पर PM मोदी को कहा- शुक्रिया
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अफगानिस्तान के राष्ट्रपति डॉ. अशरफ गनी ने टेलीफोन पर PM मोदी को कहा- शुक्रिया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) और अफगानिस्तान (Afghanistan) के राष्ट्रपति डॉ. अशरफ गनी (President Ashraf Ghani) ने टेलीफोन पर बातचीत की. इस बातचीत में दोनों नेताओं ने एक दूसरे को ईद-अल-अजहा (Eid-Al-Adha) की शुभकामनाएं दीं. राष्ट्रपति गनी ने अफगान आवश्यकता को पूरा करने के लिए भोजन और चिकित्सा सहायता की समय पर आपूर्ति के लिए प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद दिया.

प्रधानमंत्री मोदी ने शांतिपूर्ण, समृद्ध और समावेशी अफगानिस्तान के लिए वहां के लोगों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया. दोनों नेताओं ने क्षेत्र और अन्य द्विपक्षीय हित के अन्य क्षेत्रों में विकसित सुरक्षा स्थिति पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया. बता दें पीएम मोदी ने अफगानिस्तान के राष्ट्रपति से ऐसे समय बातचीत हुई है जबकि एक हफ्ते पहले ही अफगानिस्तान चीन द्वारा आयोजित एक डिजिटल बैठक में सम्मिलित हुआ था. इस बैठक में चीन और अफगानिस्तान के अलावा पाकिस्तान और नेपाल के विदेश मंत्री भी शरीक हुए थे.

बैठक में हुई थी ये बातें
इस दौरान उन्होंने कोविड-19 महामारी को फैलने से रोकने, अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने और ‘‘बीआरआई’’ बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को बहाल करने के लिए चार सूत्री योजना पर विचार किया था. इन चार देशों की इस पहली बैठक में वांग ने इस महामारी का मिलकर मुकाबला करने पर सहमति को मजबूत करने, कोरोना वायरस संकट के राजनीतिकरण से बचने और वैश्विक स्वास्थ्य समुदाय का संयुक्त रूप निर्माण करने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन को उसकी भूमिका निभाने में उसका दृढता से समर्थन करने समेत चार सूत्री कार्ययोजना का प्रस्ताव रखा.
चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने बैठक में कहा कि कोविड-19 का चीनी टीका विकसित हो गया है और चीन इन देशों को टीके उपलबध कराएगा तथा उन्हें अपनी जनस्वास्थ्य प्रणाली मजबूत करने में मदद करेगा.

भारत के लिए क्यों जरूरी है ये मामला
महत्वपूर्ण बात यह है कि उन्होंने यह भी प्रस्ताव रखा कि महामारी के बाद चारों देश चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) के संयुक्त विकास में दृढतापूर्वक सहयोग करेंगे और काम को बहाल करेंगे.

वांग ने कहा, ‘‘ हम चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) और हिमालय पार कनेक्टिविटी नेटवर्क (टीएचसीएन)के निर्माण को सक्रियता से बढ़ावा देंगे. हम इस गलियारे का अफगानिस्तान तक विस्तार करने और क्षेत्रीय संपर्क के लाभ के और भी द्वार खोलने का समर्थन करेंगे.’’

उनका बयान काफी मायने रखता है क्योंकि यह भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव के बीच आया है. पाकिस्तान और नेपाल सीपीईसी और टीएचसीएन के तहत बड़ी बुनियादी परियोजनाओं में सक्रियता से शामिल हों, तो यह भारत के लिए चिंता का विषय होगा.

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