• June 8, 2026 6:22 pm

खाने-पीने की चीजें महंगी होने के बाद कपड़ों के दाम होने वाले हैं रॉकेट

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 04 जून 2022 | ये साल महंगाई के नाम ही चला जा रहा है। पहले खाने-पीने की चीजों में बहुत अधिक हो गई और अब कपड़ों पर भी महंगाई की मार पड़ने वाली है। यानी खाना तो महंगा होगा ही, अब पहनना भी महंगा हो सकता है। अचानक से कॉटन (कपास) और यार्न (कच्चा धागा) की कीमतें रॉकेट हो गई हैं। कपड़े बनाने के कच्चे माल में आई महंगाई का सीधा असर कपड़ों की कीमत पर पड़ रहा है। कपड़ों की लागत अधिक हो गई तो ग्राहकों को यह कपड़े बिक भी महंगे दाम पर रहे हैं।

दाम इतने अधिक हो जाने के चलते तमिलनाडु के तिरुपुर में कॉटन इंडस्ट्री पर असर साफ दिख रहा है। पहले वहां की होलसेल दुकानों में खूब ग्राहक आते थे, लेकिन अब दाम बढ़ने के बाद तो जैसे सूखा ही पड़ गया है। ऐसे में कपड़े बनाने की फैक्ट्रियां अब अपनी क्षमता से बहुत कम काम कर रही हैं। पिछले महीने तक जो स्पोर्ट्सवीयर सिर्फ 100 रुपये में मिलते थे, अब उनकी कीमत 130 रुपये हो गई है।

जून 2020 में कॉटन 37 हजार रुपये प्रति कैंडी (356 किलो) और यार्न 210 रुपये प्रति किलो थे। जून 2021 तक कॉटन का दाम 51 हजार रुपये प्रति कैंडी हो गया और यार्न 271 रुपये प्रति किलो बिकने लगा। अब मई 2022 में कॉटन के दाम रॉकेट होकर 97,500 करोड़ रुपये प्रति कैंडी और यार्न के दाम 446 रुपये प्रति किलो हो गए हैं।

सिर्फ तिरुपुर से ही भारत के कुल टेक्सटाइल एक्सपोर्ट का 54.2 फीसदी योगदान आता है। कोरोना काल में भी यहां से 2021-22 में करीब 33,525 करोड़ रुपये का निर्यात हुआ, जो देश के कुल एक्सपोर्ट रेवेन्यू का करीब 1 फीसदी है। अगर घरेलू बाजारों को भी जोड़ लिया जाए तो तिरुपुर से करीब 75 हजार करोड़ रुपये की टेक्सटाइल सेल होती है। वैसे तो टेक्सटाइल एक्सपोर्ट लगातार बढ़ रहा है, लेकिन घरेलू बाजार में बढ़ी कीमतों का असर बहुत बड़ा हो सकता है।

टेक्सटाइल प्रोडक्ट्स की कीमतों में अभी जो बढ़ोतरी दिख रही है, वह तो मामूली है। दरअसल, कच्चे माल में आई सारी तेजी को ग्राहकों तक ट्रांसफर नहीं किया गया है, ताकि डिमांड अचानक से बहुत अधिक ना गिर जाए। तिरुपुर के व्यापारियों का मानना है कि अगर कॉटन और यार्न की कीमतों पर लगाम नहीं लगी तो आने वाले दिनों में हालात बहुत खराब हो सकते हैं।

Source;- “नवभारत टाइम्स ”


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