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शिवकाशी कैसे बनी ‘पटाखों की राजधानी’, कभी यहां होता था 6,000 करोड़ का कारोबार

ByPrompt Times

Oct 29, 2024
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दिवाली पर पटाखे चलाना भारतीय संस्कृति का हिस्सा है. क्या आप जानते हैं कि भारत में तमिलनाडु के शिवकाशी को पटाखों की राजधानी कहा जाता है. लेकिन शिवकाशी में पटाखों का कारोबार शुरू कैसे हुआ. एक समय में ये 6,000 करोड़ रुपए का था और आज ये कैसे बदल रहा है?

 

पटाखे… दिवाली के त्योहार से जुड़ी वो परंपरा है जो छोटों से लेकर बड़ों तक को रोमांचित करती है. हालांकि आजकल पटाखे चलाएं या नहीं चलाएं इसे लेकर बहुत विवाद बना रहता है. फिर भी क्या आपको पता है कि भारत में पटाखों की राजधानी तमिलनाडु के शिवकाशी को कहा जाता है. यहां पटाखे कैसे बनने शुरू हुए, कैसे उनका कारोबार फला फूला और एक समय में 6,000 करोड़ रुपए तक पहुंच गया.

 

पटाखे या आतिशबाजी, आधुनिक समय में इसकी शुरुआत चीन से मानी जाती है. बारूद यानी गन पाउडर का जन्म छठी से नौंवी सदी के बीच हुई. तांग वंश के समय बारूद की खोज हुई और इसी से पटाखों का निर्माण संभव हुआ. भारत को बारूद और आतिशबाजी से परिचय कराने का श्रेय मुगलों को जाता है. पानीपत की पहली लड़ाई में मुगल बारुद और तोप लेकर भारत आए. इसी के साथ भारत में बारूद का आगमन हुआ.

 

बाबर अपने साथ बारूद को लेकर भारत आया और अकबर के समय तक आतिशबाजी शादी-ब्याह और उत्सवों का हिस्सा बन गई. चीन में बारूद को बांस में भरकर फोड़ा जाता था जिसे जोर की आवाज होती थी. भारत में बांस की जगह मिट्टी के छोटे बर्तनों और आज के समय में गत्ते और कागज ने बांस की जगह ले ली. जो आज आधुनिक पटाखे का रूप है. क्या आपको पता है कि शिवकाशी कैसे पटाखों की राजधानी बना?

 

शिवकाशी ऐसे बना पटाखों की राजधानी

शिवकाशी से पहले पटाखे बनाने के कारखाने अंग्रेजों के दौर में कलकत्ता में लगने शुरू हुए. जिन कारखानों में दियासिलाई (माचिस) बनती थी, उन्होंने ही पटाखे बनाने का कारोबार शुरू किया. बाद में यहीं से एक फैक्टरी शिवकाशी ट्रांसफर हुई. दरअसल शिवकाशी के रहने वाले पी. अय्या नादर और उनके भाई शामुंगा नादर 1923 में नौकरी की तलाश में कलकत्ता पहुंचे और वहां एक माचिस फैक्टरी में काम शुरू किया.

करीब 8 महीने में काम सीखने के बाद वह वापस लौट आए और जर्मनी से मशीनें मंगाकर ‘अनिल ब्रांड’ और ‘अय्यन ब्रांड’ नाम से माचिस बनाने का काम शुरू किया. फिर उन्होंने इसी ब्रांड नाम से पटाखे बाजार में उतारे और देखते ही देखते शिवकाशी देश की पटाखा राजधानी बन गया.

 

घटता जा रहा है पटाखे का कारोबार

तमिलनाडु के शिवकाशी में मौजूदा वक्त में करीब 8,000 छोटी-बड़ी पटाखा फैक्टरी काम कर रही हैं. इनका सालाना कारोबार भी करीब 1,000 करोड़ रुपए का है. एक समय में इनका कारोबार 6,000 करोड़ रुपए का था और भारत से बड़ी मात्रा में विदेश में भी पटाखों का निर्यात होता था. ग्रीन पटाखे और बदलते समय के साथ यहां के कारोबार का तरीका भी बदल गया है. मौजूदा दौर में यहां के पटाखा प्रोडक्शन में भी 40 फीसदी से ज्यादा की कमी आ चुकी है.

 

 

source – prompt times


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