• June 4, 2026 10:07 pm

शहीद हुए पर मुगलों के सामने नहीं झुके… पढ़ें गुरु गोबिंद सिंह के साहिबजादों की शहादत का किस्सा

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26 दिसंबर 2023 ! अजीत सिंह, जुझार सिंह, जोरावर सिंह और फतेह सिंह… ये चारों गुरु गोबिंद सिंह जी के पुत्र थे, जिनकी शहादत के सम्मान में वीर बाल दिवस मनाया जा रहा है. 26 दिसम्बर के दिन जोरावर सिंह और फतेज सिंह शहीद हुए. वो मुगलों के सामने झुके नहीं. मुगलों ने उनसे मुस्लिम धर्म को कुबूल करने की शर्त के बदले उन्हों जिंदा छोड़ने की बात कही, लेकिन उन्हें शहीद होना मंजूर था, पर उनकी शर्त नहीं.

वीर बाल दिवस उनकी शहादत को समर्पित है. इस खास दिन पर पीएम मोदी हिस्सा दिल्ली और छत्तीगढ़ में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे. जानिए गुरु गोबिन्द सिंह जी के पुत्रों की शहादत का किस्सा.

गुरु गोबिंद सिंह जी और उनके साहिबजादे के संघर्ष की शुरुआत आनंदपुर साहिब किले से हुई. मुगलों और गुरु गोबिंद सिंह जी के बीच कई महीने से जंग चल रही थी. मुगल तरह-तरह की रणनीति बना रहे थे, लेकिन गुरु गोबिंद सिंह जी भी हार मानने को तैयाार नहीं थे. उनके इस साहस से औरंगजेब भी हैरान था.

महीनों चली जंग में जब औरंगजेब को जीत हासिल न हुई तो उसने कूटनीति अपनाई. उसने गुरु गोबिंद सिंह जी को पत्र भेजा, जिसमें लिखा था कि मैं कुरान की कसम खाता हूं कि अगर आनंदपुर किले को खाली कर दिया जाता है तो मैं बिना रोकटोक आप सभी को यहां से जाने दूंगा.

गुरु गोबिंद सिंह जी ने किले को छोड़ना बेहतर समझा, लेकिन वही हुआ जिसके लिए मुगलों को जाना जाता था. औरंगजेब ने धाेखा दिया और उनकी सेना पर हमला कर दिया. सरसा नदी के किनारे लम्बा युद्ध चला और उनका परिवार बिछड़ गया.

गुरुगोबिंद सिंह के छोटे साहिबजादे जोरावर सिंह और साहिबजादे फतेह सिंह दादी मांं गुजरी देवी संग चले गए. बड़े बेटे पिता के साथ सरसा नदी को पार करने के बाद चमकौर साहिब गढ़ पहुंच गए. दादी मां के साथ दोनों छोटे बेटे जंगल से गुजरते हुए एक गुफा तक पहुंचे और वहीं ठहर गए. उनके पहुंचे की यह खबर लंगर की सेवा करने वाले गंगू ब्राह्मण को मिली और वो उन्हें अपने घर ले आया.

गंगू ने पहले गुजरी देवी के पास रखी अशर्फियों को चुराया. फिर और अशर्फियों के लालच में उनकी मौजूदगी की जानकारी कोतवाल को दे दी. कोतवाल ने तुरंत कई सिपाही भेजकर माताजी और साहिबजादों को कैदी बना लिया. अगली सुबह इन्हें सरहंद के बसी थाने ले जाया गया. इनके साथ इनके समर्थन में सैकड़ों लोग साथ चल रहे थे.

सरहंद में माताजी और साहिबजादों को ऐसी ठंडी जगह पर रखा गया, जहां बड़े-बड़े लोग हार मान जाएं. इन्हें डराया गया, लेकिन इन्होंने हार नहीं मानी.

सोर्स :- ” TV9 भारतवर्ष    


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