• June 6, 2026 10:53 am

इस साल गूगल में भी जॉब नहीं, भर्ती प्रक्रिया धीमी करेगी कंपनी

Share More

14जुलाई 2022 दुनिया में अगले साल मंदी आए या नहीं, लेकिन बड़ी टेक कंपनियों में इसका डर दिखने लगा है। मेटा के बाद अब गूगल ने भर्ती में कमी करने का फैसला लिया है। गूगल की पैरेंट कंपनी अल्फाबेट के CEO सुंदर पिचाई ने कर्मचारियों को चिट्ठी लिखकर इसकी जानकारी दी है। पिचाई ने कहा है कि कंपनी भर्तियों की रफ्तार कम करेगी। आवश्यक सेवाओं के लिए भर्तियां जारी रखेगी। ईमेल में कहा है कि 2022 और 2023 में कंपनी का फोकस सिर्फ इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी एनालिसिस और खास पदों पर कर्मचारियों की भर्ती करने पर है।

2022 के पहले भाग में कंपनी ने कर्मचारियों की भर्ती का कोटा पूरा कर लिया है। पिचाई ने लिखा है कि अन्य कंपनियों की तरह हम भी आर्थिक प्रभाव से अछूते नहीं रहेंगे। दूसरी तिमाही में ही हम गूगल में 10,000 कर्मचारी जोड़ चुके हैं। इस साल का भर्तियों का लक्ष्य हमने लगभग पूरा कर लिया है। इसलिए बचे दिनों के लिए भर्ती प्रक्रिया को धीमा कर रहे हैं। पिचाई के ईमेल से साफ है कि गूगल को भी अब आर्थिक मंदी आती दिखाई दे रही है।

आर्थिक अस्थिरता से गूगल भी अछूती नहीं
सुंदर पिचाई ने ईमेल में लिखा है कि, “अन्‍य कंपनियों की तरह हम भी आर्थिक प्रतिकूलताओं से अछूते नहीं हैं। अनिश्चित वैश्विक आर्थिक परिदृश्‍य की हम अनदेखी नहीं कर सकते। हमने हमेशा ऐसी चुनौतियों को बाधाओं के रूप में नहीं बल्कि इनको अवसर के रूप में देखा है। वर्तमान परिस्थितियों को भी हम अवसर में बदलेंगे।”

इन क्षेत्रों में होगी भर्ती
पिचाई ने कहा कि 2022 और 2023 में कंपनी का फोकस इंजीनियरिंग, टेक्निकल और अन्‍य जरूरी सेवाओं में ही कर्मचारियों की भर्ती करने पर रहेगा। पिचाई ने ईमेल में लिखा है कि दूसरी तिमाही में ही हम गूगल में 10,000 कर्मचारी जोड़ चुके हैं। तीसरी तिमाही में भी हमारा इरादा कर्मचारियों की भर्ती करने का है और इसका पता हमारे कॉलेज रिक्रूइटिंग कैलेंडर से चलता है। पिचाई ने कहा कि इस साल का भर्तियों का लक्ष्‍य हमने लगभग पूरा कर लिया है, इसलिए हम इस साल के बाकी बचे दिनों के लिए भर्ती प्रक्रिया को धीमा कर रहे हैं।

सुंदर पिचाई की इस ईमेल से साफ है कि गूगल को भी अब आने वाले दिनों में आर्थिक मंदी आती दिखाई दे रही है। इसलिए अब कंपनी ने उन डिपार्टमेंट्स के लिए ही कर्मचारी रखने का फैसला किया है जिनमें कर्मचारियों की पूरी संख्‍या के बिना काम नहीं चल सकता।

source “दैनिक भास्कर”


Share More

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *