शीला बुआ के जज्बे को सलाम करते हैं लोग
उत्तरप्रदेश

शीला बुआ के जज्बे को सलाम करते हैं लोग

कासगंज। मेहनत और इरादे में ईमानदारी हर मुश्किल में नया जज्बा पैदा करती है। अमांपुर के खेड़ा निवासी शीला देवी उम्र 62 वर्ष के जज्बे को आज लोग सलाम कर रहे हैं। खेड़ा गांव निवासी रामप्रसाद की पांच बेटियों में सबसे बड़ी शीला की शादी 1980 में अवागढ़ के रामप्रकाश के साथ हुई थी।

एक वर्ष बाद ही पति की मौत हो गई। पति की मौत के बाद शीला बुआ वापस अपने पिता के घर खेड़ा आकर रहने लगी। लेकिन यहां भी किस्मत ने उनका साथ नही दिया और 1996 में पिता का साया भी सिर से उठ गया। कुछ समय बाद माता का सहारा छिनने के बाद उन्होंने अपने घर की जिम्मेदारी खुद ही संभाली। वह किसी पर बोझ नहीं बनना चाहती थीं। जिसके बाद से वह साइकिल से अमांपुर कस्बे में दूध बेचकर अपना जीवन यापन कर रही हैं। लेकिन उम्र को मात देकर वह आत्मनिर्भर है। उन्होंने किसी के आगे हाथ नहीं फैलाया। घर की मर्यादा तोड़ कर दहलीज से कदम बाहर निकाल दिया। गांव खेड़ा से 6 किलोमीटर दूर अमांपुर कस्बे में साइकिल से दूध बेचने जाती हैं।

खेड़ा गांव से प्रतिदिन परिवार के गुजारे के लिए 25 वर्षों से से दूध बेचकर अपना और परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं। शुरुआत उन्होंने 2 पशुओं से की आज उनके पास 5 भैंसे है। इन पशुओं का पूरा काम वह खुद ही संभालती है। उनके चारे-दाने से लेकर दूध निकालने और फ़िर दूध बेचने का काम शीला बुआ खुद ही करती है। उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है।

मायके में 25 साल से कर रही है पशुपालन। लोग उन्हें शीला बुआ के नाम से बुलाते है। उनका उद्देश्य ही महिला सशक्तीकरण है। शीला बुआ को सरकारी योजनाओं का नहीं मिला लाभ।शीला बुआ ने बताया कि उनकी पेंशन बनी थी। अब वह भी बंद हो गई है।

किसान सम्मान निधि योजना में भी कई बार रजिस्ट्रेशन कराया लेकिन हमें अभी तक कोई लाभ नहीं मिला है। शीला बुआ ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और जिलाधिकारी महोदय से सरकारी योजनाओं का लाभ दिए जाने की मांग की है।

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