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ढाई साल में चुनौती के साथ सफलता भी

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सम्पादकीय

17-जुलाई-2021 | छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार मुख्य मंत्री भूपेश के नेतृत्व में ढाई साल पूरे कर चुकी है. कोरोना के कारण इस दौरान भले ही विकास के बड़े काम नहीं हुए हों, लेकिन राज्य की अर्थ व्यवस्था को नियंत्रण में रखने में मुख्य मंत्री ने सफलता हासिल जरूर की है. उनके आलोचक भी इस बेच काम नहीं रहे। किन्तु उन्होंने सख्ती से सरकार के फैसलों को लागू करते हुए छत्तीसगढ़ को कोरोना के खिलाफ जंग में भी सफलता दिलाई है. अब जबकि कोरोना की दूसरी लहर समाप्त होने की कगार पर है, ऐसे में मुख्य मंत्री लगातार विकास कार्यों का शिलान्यास कर रहे हैं. आर्थिक स्थिति बहुत बेहतर नहीं होने और लॉक डाउन होने के बावजूद राज्य में राजस्व की स्थिति भी बहुत हद तक नियंत्रण में है. किसान न्याय योजना और गोबर खरीदी योजना जैसे नए फैसलों से भी मुख्य मंत्री ने देश का ध्यान खींचा है.. वहीँ अपने विरोधियों का सामना करने में भी भूपेश बघेल पीछे नहीं हटे.

अब छत्तीसगढ़ में टीकाकरण भी वापस पटरी पर आने लगा है. इन सकारात्मक स्थितियों के कारण अब मुख्य मंत्री विकास कार्यों को प्राथमिकता देने में जुट गए हैं. उनका कहना है कि छत्तीसगढ़ में किसानों की समृद्धि से ही राज्य में समृद्धि आएगी. वे चचाहते हैं कि यहाँ के किसान धान और अन्य पारम्परिक फसलों के साथ ही उद्यानिकी फसलों की खेती भी करें. वहीँ कोदो-कुटकी के साथ नाशपती, काजू, लीची, स्ट्राबेरी का उत्पादन भी होना चाहिए। वे फलों की खेती पर भी जोर दे रहे हैं. जशपुर में चाय की खेती हो रही है. और वहां चाय की प्रोसेसिंग यूनिट भी स्थापित की गई है. राज्य के विभिन्न जिलों में

स्थापित गौठानों के जरिए महिला स्व-सहायता समूहों को गांवों में ही रोजगार दिया जा रहा है. कोरोना काल में स्व-सहायता समूहों की महिलाओं ने महुआ से सेनेटाइजर बनाकर खूब नाम कमाया है। यहां की महिलाओं द्वारा बनाए गए चवनप्राश भी खूब प्रसिद्ध हो रहा है. रायगढ़ जिले के लैलूंगा के जवाफूल चावल के उत्पादन बढ़ाने निर्यात करने और इसकी ऑनलाईन प्लेटफॉर्म पर बिक्री के लिए शासन द्वारा व्यवस्था की जा रही है.

राज्य सरकार ने यह पहल भी की है कि जिन खेतों में किसानों ने पिछली बार धान बोया था, इस साल यदि वे दूसरी फसल लेते है या फिर वृक्षारोपण करते है उन्हें धान पर मिलने वाली आदान सहायता से ज्यादा आदान सहायता राशि दी जाएगी। इसी कड़ी में बस्तर सरगुजा के वनोपज भी बड़े बदलाव का जरिया बन रहे हैं. इस तरह के प्रयासों से ही मुख्यमंत्री गाँवों की अर्थ व्यवस्था को मजबूती देने में सफल हो रहे हैं.

संपादक;-वी.जे. कुमार


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