04 जून 2022 | विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कारणों से लॉजिस्टिक की लागत बढ़ गई है और इसका असर सभी तरह की वस्तुओं पर हो रहा है। एसोचैम के पूर्व प्रेसिडेंट और लॉजिस्टिक कंपनी टीसीआईएल के चेयरमैन विनीत अग्रवाल ने दैनिक भास्कर के अजय तिवारी से बातचीत में यह जानकारी दी। उन्होंने यह भी कहा कोविड का असर खत्म होने के बाद मांग ऑनलाइन से वापस ऑफलाइन की तरफ शिफ्ट हो रही है। बातचीत के मुख्य अंश…
भारत के उद्योग जगत में किस तरह के हालात दिख रहे हैं?
उद्योग जगत में सकारात्मक माहौल बन गया है। कैपिटल गुड्स और इंजीनियरिंग सेक्टर में अच्छी ग्रोथ है। सरकार ने बुनियादी क्षेत्रों के विकास में खर्च बढ़ाया है। निजी कंपनियों का कैपेक्स भी बढ़ रहा है। ये ट्रेंड वर्तमान के साथ ही लॉन्ग टर्म के लिए काफी अच्छा है। क्षमता विस्तार हो रहा है और नया निवेश आ रहा है।
हाल के महीनों में व्यापार के ट्रेंड्स में कोई बदलाव हुआ है?
महामारी के समय ऑनलाइन पर जोर था, लेकिन अब दुकानें और व्यवसाय पूरी तरह खुल गए हैं। मांग वापस ऑनलाइन से ऑफलाइन पर शिफ्ट हो रही है। हालांकि पिछले कुछ महीनों से महंगाई बढ़ी है, लेकिन फिलहाल इसका मांग पर बहुत ज्यादा असर दिखाई नहीं दे रहा है।
लॉजिस्टिक इंडस्ट्री में क्या खास बदलाव आए हैं?
इंडस्ट्री में ऑर्गनाइज्ड सेक्टर की हिस्सेदारी बढ़ रही है। जीएसटी आ गया है, ई-वे बिल आ गया है। इसकी वजह से अब पूरा बिजनेस ऑर्गनाइज्ड हो रहा है। कंपनियों की मजबूरी है कि वे अब नियम-पालन करके काम करें। इसकी वजह से एक व्यवस्थित ग्रोथ भी दिख रही है।
डीजल की ऊंची कीमतों का लॉजिस्टिक्स पर क्या असर है?
हालांकि ईंधन की कीमतें बढ़ने का असर हम पर सीधे उतना नहीं पड़ता क्योंकि हम बढ़ी हुई ईंधन की लागत को कस्टमर के पास फारवर्ड कर देते हैं। लेकिन इसकी वजह से अन्य लागतों पर असर जरूर पड़ता है।
रूस-यूक्रेन युद्ध और चीन में लॉकडाउन का इंडस्ट्री पर क्या असर हुआ है?
कोविड महामारी के बाद से ही हर दो-तीन महीने में बहुत नाटकीय बदलाव आ रहे हैं। पहले लॉकडाउन हुआ था तो कंटेनर अटक गए थे। फिर स्वेज नहर में जहाज फंसने से शिपिंग रेट्स बढ़ गए थे। फिर डिमांड बढ़ने से कंटेनर की किल्लत हो गई। वापस चाइना में लॉकडाउन से कंटेनर की किल्लत आने लगी है। हमें लगता है कि तीन से चार महीने यह स्थिति बनी रहेगी।
आम उपभोक्ता पर इसका क्या असर होगा? चीजें महंगी होंगी?
बिलकुल असर पड़ेगा, और पड़ भी रहा है। कुछ चीजें महंगी हो गई हैं, कुछ की उपलब्धता घट गई है। हालांकि लॉजिस्टिक की लागत का असर हर सेक्टर पर अलग-अलग पड़ता है। टीवी या इलेक्ट्रॉनिक उपकरण की लॉजिस्टिक कॉस्ट कम है, लेकिन सीमेंट की लागत में लॉजिस्टिक की हिस्सेदारी 25-30 फीसदी तक होती है।
इन चुनौतियों के बीच आपकी कंपनी का प्रदर्शन कैसा रहा?
नतीजे काफी अच्छे रहे। कंटेनर के रेट और वॉल्यूम बढ़ने का हमें काफी फायदा मिला है। हमारा टर्नओवर बढ़कर 3300 करोड़ का हो गया है और साल भर में 290 करोड़ का मुनाफा हुआ है। 2023 में भी हमें रेवेन्यू में 10 से 15 फीसदी बढ़ोतरी की उम्मीद है।
Source;- ‘’दैनिक भास्कर’’
