• June 5, 2026 12:24 pm

विधायक को डांट लगाई, शिक्षक को जमीन वापस दिलाई… पढ़ें सियासी अखाड़े के पहलवान मुलायम सिंह यादव के 5 दिलचस्प किस्से

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अक्टूबर 10 2023 ! अखाड़े में उनका चरखा दांव बहुत प्रसिद्ध था. जब यह पहलवान राजनीति में उतरा तो यहां भी उनके दांव बड़े कारगर होते. वे जिसे चाहते थे, उसे दिल से चाहते थे. कार्यकर्ता उनके लिए बहुत महत्वपूर्ण थे. जब विधायक, मंत्री बने तब पूरे राज्य में उनके समर्थकों की संख्या लाखों में पहुंच गई. इसीलिए जब राजनीतिक दल का गठन करने का फैसला किया तो वे अकेले नहीं रहे, उनके पीछे कार्यकर्ताओं की एक बड़ी फौज खड़ी हो गई और फिर यह सियासी पहलवान जब तक इस धरा पर रहा, तब तक पीछे मुड़कर नहीं देखा. केंद्र की सरकार बनाने से लेकर गिराने तक में भूमिका थी तो राज्य में वे सभी दलों के प्रिय रहे.

समाजवादी पार्टी के संस्थापक, देश के रक्षा मंत्री और उत्तर प्रदेश के कई बार सीएम रहे मुलायम सिंह यादव की आज यानी 10 अक्तूबर को पहली पुण्यतिथि है. उनकी यारबाजी, दोस्ती के किस्से इटावा से लेकर गाजियाबाद और सोनभद्र तक भरे पड़े हैं. उनकी याद्दाश्त गजब थी. जिसे चाहते थे, पूरे मन से चाहते थे. मदद करते थे तो दिल से करते थे. उनके राजनीतिक किस्से बहुतेरे हैं लेकिन उनकी मानवीय संवेदनाओं से जुड़े किस्से उन्हें पहले भी राजनीति में अलग करते थे और आज भी.

वे यारों के यार थे. जिसे चाह लिया उसे सड़क से उठाकर विधायक, मंत्री बना दिया. जिसे चाह लिया उसकी मदद को कई बार कानून में भी हेराफेरी करवा देते. उन्हें जो लोग जानते हैं, सबके पास अपने किस्से है. पढ़ें मुलायम सिंह यादव की जिंदगी से जुड़े कुछ खास किस्से, जो उनके व्यक्तित्व के सकारात्मक पहलू की ओर इशारा करते हैं.

सीएम के रूप में वे प्रदेश के दौरे पर थे. उनके साथ हेलिकॉप्टर में वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद गोस्वामी भी थे. जाड़े का दिन था. एयरपोर्ट से निकले तो अंधेरा हो गया था. वहां से घर के लिए निकले, काफिला जब समाजवादी पार्टी दफ्तर के सामने से गुजरा तो उन्हें एक झुंड दिखा. काफिला को मोड़ कर वापस आए. लोगों से मिले. हक से डांटा. दिन में आया करो. कभी भी चल देते हो. सबका कागज लिया और चल पड़े.

काफिला सौ मीटर भी नहीं पहुंचा एक बार फिर से गाड़ी मुड़वा ली. वहां पहुंचकर पार्टी कार्यालय के लोगों को बुलवाया. सभी के रहने-खाने का इंतजाम करने को कहा. बोले-इनमें से किसी के पास होटल जाने का पैसा नहीं है. गद्दे-राजाई मंगवाकर सुला दीजिए. जाड़े में कहां जाएंगे? गोस्वामी कहते हैं कि यह उनकी खूबी थी, जब वे अपने कार्यकर्ताओं के लिए कुछ भी करने को तैयार हो जाते थे.

सोर्स :- ” TV9 भारतवर्ष    


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