• June 7, 2026 1:05 pm

क्या कहता है विज्ञान: क्यों बहुत ही मुश्किल है भूकंपों का पूर्वानुमान लगाना?

Share More

12 फ़रवरी 2023 | भूंकप के विनाश की हद जो इस बार तुर्किये (Earthquake in Turkey) में दुनिया ने देखी है वह इससे पहले कभी नहीं देखी गई है. भूकंपों को आए एक सप्ताह भी पूरा नहीं हुआ है कि मरने वालों की संख्या 22 हजार से पार हो चुकी है. राहतकर्मी इस बात से परेशान हैं कि हर तरफ मलबे में फंसे लोगों में से वे पहले किसे निकालें. लेकिन क्या इसतरह के भूकंपों का पूर्वानुमान लगाना संभव है. ऐसा क्यों है कि इतनी विनाशकारी प्राकृतिक आपदा के पूर्वानुमान (Prediction of earthquakes) लगाने की क्षमता तमाम तकनीकी उन्नतियों के बाद भी अभी तक विकसित नहीं हो सकी है. इस बारे में क्या कहता है विज्ञान (What does science say)?

सीधा जवाब है पर आसान नहीं
इस सवाल का जवाब आसान नहीं है और इसकी भी वजह है. भूकंप के पूर्वानुमानों में तीन पहलुओं की भूमिका होती है. इन्हें एपीसेंटर यानि सतह पर भूकंप का केंद्र जिसे अभिकेंद्र कहते है, समय और मात्रा कहा जाता है. लेकिन इनके अलावा भी बहुत सारे कारकों का ध्यान रखना होता है. लेकिन वैज्ञानिक तौर पर कहा जाए तो पृथ्वी के अंदर की कार्यप्रणाली की जटिलता को देखते हुए अभी तो भूकंप का पूर्वानुमान लगाना संभव नहीं ही है.

क्या हो सकता है मुमकिन
पर ऐसा क्यों हैं यह जानना भी जरूरी है जो इस सवाल का जवाब देगा कि ऐसा कब संभव हो सकता है. पृथ्वी के अंदर भूकंप की प्रक्रियाएं और प्रणालियां बहुत जटिल हैं और जिसमे बहुत से कारकों की तो जानकारी ही नहीं है जिन्हें जानना आज भी संभव नहीं है. इनमें से एक ही भूकंप की उत्पत्ति का केंद्र जिसे फोकस या अवकेंद्र कहते हैं. शायद भविष्य में इन कारकों को जानने के बाद भूकंपों का पूर्वानुमान संभव हो.

क्या है संभावना जताने की सच्चाई
लेकिन कई बार वैज्ञानिकों को यह पता रहता है कि किसी क्षेत्र में कभी भी या किस साल या कितने सालों के अंतराल में कभी भी आ सकता है. इसकी वजह यह है कि दुनिया के कई ऐसे इलाके हैं जहां भूकंप आने की संभावना ज्यादा होती है. और अनुभव से उनकी आवृत्ति का अंदाजा भी हो जाता है. पृथ्वी की टेक्टोनिक प्लेटों के बीच की रगड़ अधिकांश भूकंपों के आने का कारण बनती हैं.

अनुमानों की संभावनाएं
प्लेटों की बीच के परस्पर गतिविधि की दर कम ज्यादा होने से भूकंप बार बार आएंगे  या कभी कभी आएंगे यह पता चलता है. जैसे उत्तरी अमेरिका और प्रशांत क्षेत्र की प्लेट के बीच की दरार जिसे सैन एंड्रियास फॉल्ट कहते हैं, में टकारव धीमी 35 मीमी प्रति वर्ष की दर से होता है इसलिए हर 150 साल में कैलिफोर्निया में बड़ा भूकंप आना चाहिए जबकि पिछला बड़ा भूकंप यहां 175 साल पहले आया था. कुल मिला कर भूकंप का सटीक अनुमान अभी संभव नहीं है.

तूफान तो भूकंप क्यों नहीं
भूकंपों के पूर्वानुमान की तुलना तूफानों के पूर्वानुमानों से की जाती है. दलील दी जाती है कि अगर तूफानों का कुछ दिन पहले ही पूर्वानुमान लगाना संभव है, तो भूकंप का क्यों नहीं. लेकिन तूफानों के तो सैटेलाइट से भी अवलोकन किया जा सकता है, पर पृथ्वी की सतह के नीचे की गतिविधियों के लिए हम भूकंपीय तरंगों पर ही निर्भर हैं जो हमें भूकंप के ठीक पहले ही मिल पाती हैं और विस्तृत जानकारी पाने में सैंकड़ों साल तक लग जाते हैं.

आंकड़ों की कमी
इसके अलावा भूकंपों के अनुमानों के लिए हमारे पास आंकड़ों की बहुत कमी हैं. भूकंपीय प्रक्रियाओं में सालों का समय लगता है और उनके बारे मे पूरी तरह से जानने के लिए हमारे अवलोकन और आंकड़े काफी कम समय के हैं. लेकिन कुछ सौ साल बाद संभव हो सकेगा हमारी संभावनाओं वाले पूरर्वानुमान सटीकता के निकट पहुंच सकेंगे.

फिलहाल दुनिया भर में भूकंपीय समुदाय ने एक शुरुआती चेतावनी तंत्र जरूर विकसित किया है जिसमें 5 से 30 सेकेंड पहले भूकंपीय तंरगों की तीव्रता से पता चल जाता है कि कहां भूकंप आने वाला है. लेकिन भूकंपों के प्रभावों को कम करने के लिए हम बहुत कुछ कर सकते हैं.हम कुछ सेकेंड में आपात सेवाएं जैसे गैस पाइपलाइन बंद कर सकते हैं. हम पहले से ही ऐसी डिजाइन वाली इमारतें बना सकते हैं जिन्हें भूकंप से कम हानि हो.

सोर्स :-“न्यूज़ 18 हिंदी|”   

Share More

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *